अंतर्राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स

जो बाईडेन ने 1.9 ट्रिलियन डालर की योजना की घोषणा की

अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति चुनाव जो बाईडेन ने हाल ही में 1.9 अमरीकी डालर की एक योजना की घोषणा की है। यह एक कोविड-19 प्रोत्साहन पैकेज है।

मुख्य विशेषताएं 

  • अमेरिका में बाईडेन के राष्ट्रपति कार्यकाल के पहले 100 दिनों के भीतर स्कूलों को सुरक्षित रूप से खोलने में मदद करने के लिए 130 बिलियन डालर प्रदान किये जायेंगे।
  • योग्य व्यक्तियों को 1,400 डॉलर के प्रोत्साहन भुगतान किया जायेगा।
  • इस पैकेज में कोविड-19 वायरस की प्रतिक्रिया को बढ़ावा देने के लिए 415 बिलियन डालर और कोविड-19 वैक्सीन का रोल आउट भी शामिल है।
  • इस पैकेज में एक ट्रिलियन डालर की सीधी राहत भी शामिल है।
  • यह पैकेज विशेष रूप से छोटे व्यवसायों और समुदायों की सहायता के लिए 440 बिलियन अमरीकी डालर प्रदान करेगा जो कि कोविड-19 महामारी की चपेट में हैं।
  • इस पैकेज के तहत प्रति सप्ताह 400 डॉलर का बेरोजगारी बीमा प्रदान किया जायेगा।पहले यह राशि प्रति सप्ताह 300 डॉलर थी।

अमेरिका में कोविड-19 वैक्सीन

11 जनवरी, 2021 तक 9 मिलियन से अधिक अमेरिकियों को कोविड-19 टीकाकरण की डोज़ प्रदान की गई है। हाल ही में यूनाइटेड स्टेट्स फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने फाइजर COVID-19 वैक्सीन का पहला आपातकालीन उपयोग प्राधिकरण जारी किया था।

ऑपरेशन वार्प स्पीड

यह एक सार्वजनिक-निजी साझेदारी है, जिसे कोविड-19 वैक्सीन के विकास, निर्माण और वितरण को सुविधाजनक बनाने के लिए अमेरिका में शुरू किया गया था। यह ऑपरेशन अमेरिका की सरकार द्वारा शुरू किया गया था। इसकी घोषणा मई 2020 में की गई थी।

यह ऑपरेशन टीकों के उत्पादन और तेजी से वितरण को बढ़ावा दे रहा है। यह विभिन्न प्रकार के वैक्सीन प्रौद्योगिकी को बढ़ावा दे रहा है। इस ऑपरेशन को शुरू में केयर्स एक्ट से 10 बिलियन डालर के साथ वित्त पोषित किया गया था।

अमेरिका का ‘केयर्स एक्ट’

केयर्स एक्ट का अर्थ Coronavirus Aid, Relief and Economic Security Act है। यह अमेरिका में कोविड-19 महामारी के कारण उत्पन्न आर्थिक स्थितियों का मुकाबला करने के लिए मार्च 2020 में अमेरिकी कांग्रेस द्वारा पारित 2.2 ट्रिलियन डालर का आर्थिक प्रोत्साहन बिल था।

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डोनाल्ड ट्रम्प के विरुद्ध दूसरा महाभियोग अभियान शुरू हुआ

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिका के इतिहास में ऐसे दूसरे राष्ट्रपति बन गये हैं, जिन पर दूसरी बार महाभियोग चलाया गया है। हाल ही में अमेरिका के हाउस ऑफ़ रिप्रेजेन्टेटिव्स ने उन पर महाभियोग चलाने को मंज़ूरी दी है। दरअसल हाल ही में ट्रम्प समर्थकों ने यूएस कैपिटल बिल्डिंग पर हमला किया, डोनाल्ड ट्रम्प ने बार-बार दोहराया है  कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव, 2020 में धांधली हुई है।

इससे पहले बिल क्लिंटन ने 1999 में तथा एंड्रू जॉनसन ने 1868 में इसी प्रकार की स्थिति का सामना किया था। डोनाल्ड ट्रम्प पर 2020 के चुनाव के लिए  यूक्रेन से सहायता लेने का आरोप लगा था।

अमेरिका में राष्ट्रपति पर महाभियोग

अमेरिका का संविधान हाउस ऑफ़ रिप्रेजेन्टेटिव को राष्ट्रपति के विरुद्ध महाभियोग शुरू करने की शक्ति देता है। हाउस ऑफ़ सीनेट में राष्ट्रपति के ऊपर लगाये गये आरोप का ट्रायल किया जाता है, इसकी अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश द्वारा की जाती है। सीनेट में राष्ट्रपति पर महाभियोग पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है।

भारत में राष्ट्रपति पर महाभियोग

भारत के संविधान के अनुच्छेद 61 में राष्ट्रपति को पद से हटाने के लिए प्रक्रिया का वर्णन किया गया है। भारत के राष्ट्रपति पर संविधान के उल्लंघन के कारण महाभियोग लगाया जा सकता है।

Month:

COVID-19 की उत्पत्ति की जांच के लिए WHO की टीम चीन पहुंची

Covid-19 की उत्पत्ति की जांच के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेषज्ञों की एक टीम 14 जनवरी, 2021 को चीन पहुंची। यह टीम चीन में एक ‘फील्ड विजिट’ का आयोजन करेगी।

मुख्य बिंदु

COVID-19 महामारी के तीव्र प्रसार के एक वर्ष बाद, अब 12-15 अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों की एक टीम को चीन जा कर जांच करेगी। यह टीम चीनी शोधकर्ताओं द्वारा एकत्र किए गए मानव और पशु के नमूनों की जांच करेगी। इस यात्रा के दौरान WHO की टीम चीनी वैज्ञानिकों के साथ मिलकर काम करेगी। चीनी ने डब्ल्यूएचओ के साथ सहयोग करने के लिए सहमती प्रकट की है।

गौरतलब है कि कोरोनावायरस के तीव्र प्रसार के बाद चीन पर जानकारी छिपाने का गंभीर आरोप लगाया गया था। इसके अलावा विश्व स्वास्थ्य संगठन की कार्य प्रणाली और पारदर्शिता पर भी सवाल उठाये गये थे। उसके बाद से चीन और विश्व स्वास्थ्य संगठन पर Covid-19 की जांच करने का दबाव बना हुआ है।

मई में, विश्व स्वास्थ्य सभा (डब्ल्यूएचए) ने निष्पक्ष, स्वतंत्र और व्यापक जांच करने के लिए एक स्वतंत्र जांच स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसने डब्ल्यूएचओ को “वायरस के स्रोत और मानव आबादी में संक्रमण के मार्ग” की जांच करने के लिए भी कहा था।

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कैबिनेट ने भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन को मंज़ूरी दी

हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग पर भारत और यूएई के बीच समझौते को मंजूरी दी है। इस समझौते पर भारत के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और संयुक्त अरब अमीरात के नेशनल सेंटर ऑफ मीटिरोलॉजी के बीच हस्ताक्षर किए गए हैं।

मुख्य बिंदु

भारत और यूएई के बीच इस समझौता ज्ञापन में निम्नलिखित शामिल हैं-

  • इस समझौते के तहत साझा महत्व की वैज्ञानिक और तकनीकी जानकारी को  साझा किया जायेगा।
  • इसमें प्रशिक्षण के लिए अनुसंधान विद्वानों, वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों आदि के अनुभव, उपग्रह डेटा के उपयोग पर शोध और उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के पूर्वानुमान सम्बन्धी सूचना को साझा करना शामिल है।
  • दोनों देशों के विज्ञान और प्रौद्योगिकी के मुद्दों पर वैज्ञानिक और तकनीकी कार्यशालाओं / संगोष्ठियों / सम्मेलनों और प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा।
  • महासागरीय क्षेत्र पर मौसम संबंधी अवलोकन नेटवर्क स्थापित किया जायेगा।
  • फोरकास्ट मॉडलिंग सॉफ्टवेयर के माध्यम से सुनामी प्रारंभिक चेतावनी केंद्र (TEWC) का समर्थन किया जायेगा।
  • भारत के दक्षिण और पश्चिम में और संयुक्त अरब अमीरात के उत्तर में स्थित स्थित भूकंपीय स्टेशनों से रियल-टाइम भूकंपीय आंकड़ों का आदान-प्रदान किया जायेगा।

भारत-संयुक्त अरब अमीरात संबंध

भारत और यूएई के बीच काफी मैत्रीपूर्ण संबंध हैं। दोनों देशों के बीच रेल क्षेत्र में तकनीकी सहयोग के लिए एक समझौता किया गया है। दोनों देश आतंकवाद का मुकाबला करने में मदद करते रहे हैं और हाल ही में, दोनों ने मिलकर दिल्ली में आईएसआई समर्थित आतंकवादी हमले को नाकाम कर दिया था।

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अरब-भारत सहयोग मंच का आयोजन किया गया

12 जनवरी, 2021 को अरब-भारत सहयोग मंच (Arab-India Cooperation Forum) की 3वीं वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक वर्चुअली आयोजित की गयी। इस बैठक की अध्यक्षता मिस्र के सहायक विदेश मंत्री और अरब लीग में स्थायी प्रतिनिधि मोहम्मद अबू अल-खीर और संजय भट्टाचार्य, सचिव (CPV&OIA) ने की। इस बैठक में भारत और अरब देशों के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया।

मुख्य बिंदु

इस बैठक के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों ने अरब जगत और भारत के बीच संबंधों की सराहना की। उन्होंने इस बात को भी हाईलाइट किया कि यह फोरम अरब-भारत संबंधों को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इन अधिकारियों ने संबंधित अंतरराष्ट्रीय प्रस्तावों, समझौतों और संदर्भों के अनुसार मध्य पूर्व में क्षेत्रीय मुद्दों के लिए राजनीतिक समाधान की आवश्यकता पर बल दिया।

इन अधिकारियों ने ऊर्जा और पर्यावरण अर्थव्यवस्था, व्यापार और निवेश; पर्यटन और संस्कृति; कृषि और खाद्य सुरक्षा; शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल; मानव संसाधन विकास; विज्ञान और प्रौद्योगिकी, और मीडिया के क्षेत्र में अरब-भारत सहयोग को बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।

अरब-भारत सहयोग मंच (Arab-India Cooperation Forum)

इस फोरम की पहली मंत्रिस्तरीय बैठक जनवरी 2016 में बहरीन के मनामा में आयोजित की गई थी। इस बैठक के दौरान, दोनों पक्षों द्वारा मनामा घोषणा को अपनाया गया था। मनामा घोषणा का उद्देश्य मानव तस्करी को समाप्त करना है।

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अमेरिकी उप-राष्ट्रपति माइक पेंस ने 25वें संशोधन का उपयोग करने से इनकार किया

अमेरिका के उप-राष्ट्रपति माइक पेंस ने डोनाल्ड ट्रम्प को राष्ट्रपति पद से हटाने के लिए 25वें संशोधन का उपयोग करने से इनकार कर दिया है। हालिया दिनों में अमेरिका में कैपिटल विरोध प्रदर्शन, 2021 के चलते 25वें संवैधानिक संशोधन के उपयोग का आवाहन किया जा रहा है। ट्रम्प समर्थकों ने यूएस कैपिटल बिल्डिंग पर हमला किया, डोनाल्ड ट्रम्प ने बार-बार दोहराया है  कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव, 2020 में धांधली हुई है।

अमेरिकी संविधान का 25वां संशोधन क्या है?

25वें संविधान संशोधन में यह बताया गया है कि कैसे एक अमेरिकी उपराष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति को प्रतिस्थापित किया जा सकता है। इसमें मृत्यु, इस्तीफा और राष्ट्रपति के इस हद तक अक्षम होने के बाद  कि वह अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने में असमर्थ हैं, का वर्णन किया गया है। इस संशोधन के चार खंड हैं।

संशोधन के चार खंड

  • उप-राष्टपति, राष्ट्रपति के पद से इस्तीफा देने की स्थिति में राष्ट्रपति का पद ग्रहण करेगा।
  • संशोधन के दूसरे खंड में उप-राष्ट्रपति के कार्यालय में रिक्तियों के प्रावधान शामिल हैं।
  • यदि उप-राष्ट्रपति राष्ट्रपति के रूप में कार्य करने में असमर्थता की घोषणा करता है, तो उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभाल सकता है।जब राष्ट्रपति अपनी अक्षमता की घोषणा करने में असमर्थ होता है तो संशोधन का चौथा भाग लागू किया जाता है।  उपराष्ट्रपति और कैबिनेट को संयुक्त रूप से उपराष्ट्रपति की अक्षमता साबित करना पड़ता  है।
  • वर्तमान में, अमेरिका के नागरिक और नेता राष्ट्रपति ट्रम्प के खिलाफ 25वें संवैधानिक संशोधन के इस चौथे खंड को लागू करने के लिए उपराष्ट्रपति पेंस से आग्रह कर रहे हैं।

25वां अमेरिकी संवैधानिक संशोधन कब पेश किया गया था ?

25वें अमेरिकी संवैधानिक संशोधन को 1965 में प्रस्तावित किया गया था और 1967 में राज्यों द्वारा इसकी पुष्टि की गई थी।

क्या 25वें अमेरिकी संवैधानिक संशोधन का चौथा खंड अब तक लागू किया गया है?

नहीं।

 

 

 

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