व्यक्तिविशेष करेंट अफेयर्स

अभिनेता सतीश कौल (Satish Kaul) का निधन हुआ

10 अप्रैल, 2021 को अभिनेता सतीश कौल का निधन हो गया, वे कोविड-19 से संक्रमित थे। उन्होंने अपने करियर में 300 से ज्यादा हिंदी और पंजाबी फिल्मों में कार्य किया। उन्होंने क्षेत्रीय सिनेमा के सबसे सफल अभिनेताओं में से एक माना जाता है। उन्हें पंजाबी सिनेमा का अमिताभ बच्चन भी कहा जाता है। उन्होंने महाभारत टीवी धारावाहिक में देवराज इंद्र की भूमिका निभाकार काफी प्रसिद्धि हासिल की थी।

सतीश कौल (Satish Kaul)

सतीश कौल का जन्म 8 सितम्बर, 1948 को कश्मीर में हुआ था। उन्होंने अपने करियर में ज़ंजीर, याराना, ऐलान, राम लखन, इलज़ाम जैसी फिल्मों में काम किया। उन्होंने महाभारत, विक्रम और बेताल जैसे कई लोकप्रिय धारावाहिकों में भी कार्य किया। इसके अलावा उन्होंने कई पंजाबी फिल्मों में भी काम किया। उनके कार्य के लिए उन्हें PTC Punjabi Film Awards 2011 में लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया था।

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नम्बी नारायणन (Nambi Narayanan) कौन हैं?

हाल ही  में ‘रॉकेटरी’ (Rocketry) नामक एक फिल्म का ट्रेलर जारी किया गया है। यह फिल्म एस. नम्बी नारायणन के जीवन पर आधारित है। दरअसल नम्बी नारायणन इसरो के एक वैज्ञानिक हैं, उन पर 1994 में जासूसी का झूठा आरोप लगाया गया था। जिसके कारण उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा। बाद में 2018 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने केरल सरकार को नम्बी नारायणन को क्षतिपूर्ति के रूप में 50 लाख रुपये देने का आदेश दिया था। इसके अलावा केरल सरकार ने उन्हें अलग से 1.3 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति प्रदान की। इसके अलावा भारत सरकार ने उन्हें 2019 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया था। उन्होंने इसरो के विकास इंजन के निर्माण में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

जासूसी घटनाक्रम

  • नम्बी नारायण इसरो में क्रायोजेनिक्स डिवीज़न के इंचार्ज के रूप में काम कर रहे थे।
  • 1994 में उन पर जासूसी का आरोप लगाया गया उन्हें गिरफ्तार किया गया।
  • अप्रैल, 1996 में केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने उन पर लगे आरोपों को खारिज किया।
  • 1998 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के उन्हें ‘निर्दोष नहीं’ करार दिया।
  • 2018 में सर्वोच्च न्यायालय ने नम्बी नारायणन ने उनके लिए 50 लाख रुपये के मुआवज़े की घोषणा की। इसके साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने नम्बी नारायणन की गिरफ्तारी में केरल पुलिस की भूमिका की जांच के लिए सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायधीश डी.के. जैन की अध्यक्षता में समिति का गठन किया।

एस. नम्बी नारायणन (S. Nambi Narayanan)

एस. नम्बी नारायणन एक वैज्ञानिक व एयरोस्पेस इंजीनियर हैं। उनका जन्म 12 दिसम्बर, 1941 में तमिलनाडु के कन्याकुमारी जिले में हुआ था। 1994 में उन पर दो मालदीवी इंटेलिजेंस अफसरों को ख़ुफ़िया जानकारी बेचने का आरोप लगाया गया था, इसमें राकेट और सैटेलाइट लांच का फ्लाइट टेस्ट डाटा शामिल होने का आरोप लगाया गया था। उनके साथ-साथ डी. ससीकुमारन पर भी यह आरोप लगाया गया था। उन दोनों पर ख़ुफ़िया जानकारी करोड़ों रुपये में बेचने का आरोप लगाया गया था। मई 1996 में सीबीआई ने उन पर लगे आरोपों को ख़ारिज कर दिया था। 1998 में सर्वोच्च न्यायालय ने भी यह आरोप ख़ारिज कर दिए थे।

2001 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने केरल सरकार को नम्बी नारायणन को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा देने के लिए आदेश दिया था। वे वर्ष 2001 में सेवानिवृत्त हो गये।

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भारत के पहले पर्यावरण मंत्री दिग्विजय सिंह जाला (Digvijaysinh Zala) का निधन

हाल ही में पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह जाला (Digvijaysinh Zala) का निधन हो गया, वे 88 वर्ष के थे। प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन्हें उनकी सामुदायिक सेवा और पर्यावरण के प्रति रुचि के लिए याद किया जाएगा।

दिग्विजय सिंह जाला (Digvijaysinh Zala)

दिग्विजय सिंह जाला भारत के पहले पर्यावरण मंत्री (India’s First Environment Minister) थे, उन्होंने इस पद पर 1982 से 1984 तक काम किया। इसके अलावा वे गुजरात के वाकानेर (Wakaner) से विधायक भी रह चुके हैं, वे 1962-67 तक वाकानेर से निर्दलीय विधायक रहे। बाद में 1967-71 तक वे स्वतंत्र पार्टी (Swatantra Party) के सदस्य रहे। बाद में वे कांग्रेस में शामल हुए और 1979 से 1989 तक दो बार सुरेंदरनगर (Surendranagar) से सांसद बने। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी (Indira Gandhi) द्वारा पर्यावरण मंत्रालय की स्थापना किये जाने के बाद वे 1982 से 1984 तक भारत के पहले पर्यावरण मंत्री बने। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र समेत कई अंतर्राष्ट्रीय मचों पर पर्यावरण सम्बन्धी मुद्दों पर भारत का प्रतिनिधित्व भी किया था।

दिग्विजय सिंह जाला को भारत में वन्यजीवन संरक्षण में उनकी भूमिका के लिए जाना जाता है, इसके अलावा उन्होंने कई राष्ट्रीय उद्यानों की घोषणा में भी योगदान दिया।

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रजनीकांत को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा

महान अभिनेता सुपर स्टार रजनीकांत (Rajnikanth) को वर्ष 2019 के लिए प्रतिष्ठित दादा साहेब फाल्के पुरस्कार (Dada Saheb Phalke Award) से सम्मानित किया जाएगा। सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इसकी जानकारी दी।

रजनीकांत (Rajnikanth)

रजनीकांत का जन्म शिवाजी राव गायकवाड़ (Shivaji Rao Gaekwad) के रूप में 12 दिसंबर 1950 को बैंगलोर में हुआ था। रजनीकांत ने अपनी प्राथमिक शिक्षा बैंगलोर से प्राप्त की।  स्कूली शिक्षा पूरी होने पर, उन्हें बस कंडक्टर के रूप में बैंगलोर ट्रांसपोर्ट सर्विस में नौकरी की थी। उन्होंने मद्रास अड्यार फिल्म इंस्टीट्यूट में एक अभिनय पाठ्यक्रम शुरू करने का फैसला किया। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1975 में अपूर्व रागंगाई से की थी।
रजनीकांत ने160 से अधिक फिल्मों में काम किया है। उन्होंने बॉलीवुड, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और बंगाली जैसे अन्य भारतीय फिल्म उद्योगों में भी काम किया है। उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण (2000) और पद्म विभूषण (2016) से सम्मानित किया गया था।

दादासाहेब फाल्के पुरस्कार  (Dadasaheb Phalke Award)

यह देश का सर्वोच्च फिल्म सम्मान है। इसे 1969 में सरकार द्वारा पेश किया गया था। इस पुरस्कार की स्थापना ‘भारतीय सिनेमा के जनक धुंडिराज गोविंद फाल्के की याद में की गई थी, जिन्हें दादासाहेब फाल्के के नाम से जाना जाता है। उन्होंने भारत की पहली फीचर फिल्म राजा हरिश्चंद्र (1913) का निर्देशन किया।

प्रथम प्राप्तकर्ता : देविका रानी

पुरस्कार : पुरस्कार में एक स्वर्ण कमल, एक शॉल और 10 लाख रुपये का नकद पुरस्कार शामिल है।

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लेफ्टिनेंट जनरल वाल्टर एंथोनी गुस्तावो ‘वैग’ पिंटो के बारे में 10 रोचक तथ्य

भारतीय सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल वाल्टर एंथोनी गुस्तावो “वैग” पिंटो (Walter Anthony Gustavo “WAG”) का 25 मार्च को निधन हो गया था। लेफ्टिनेंट जनरल वाल्टर एंथोनी गुस्तावो “वैग” पिंटो के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य इस प्रकार हैं :

मुख्य तथ्य

  1. 1924 में जन्मे, जनरल पिंटो ने अपनी स्कूली शिक्षा बैंगलोर और सेंट अलॉयसियस सीनियर सेकेंडरी स्कूल, जबलपुर से की थी।
  2. उन्हेंमेजर जनरल के रूप में लड़ाई में 54वें डिवीजन की कमान संभालने के लिए ‘विक्टर ऑफ बसंतार’ (Victor of Basantar) के नाम से जाना जाता था ।
  3. उन्होंने अंतिम रूप से मध्य कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में कार्य किया।
  4. 1971 के भारत-पाक युद्ध में उनकी प्रमुख सामान्य भूमिका के लिए, उन्हें प्रतिष्ठित परम विशिष्ट सेवा पदक (PVSM) से सम्मानित किया गया।
  5. उनके पिता अलेक्जेंडर पिंटो गोवा के सांता क्रूज के पिंटो की गुस्ताव पिंटो शाखा से सम्बंधित थे, जो उस समय पुर्तगाली भारत का हिस्सा था।
  6. वे रॉबर्टसन कॉलेज जबलपुर में कॉलेज गए, जहाँ उन्होंने डी कंपनी, 10वीं नागपुर बटालियन, यूनिवर्सिटी ट्रेनिंग कॉर्प्स (यूटीसी) में दाखिला लिया।
  7. जनरल पिंटो ने एक किताब ‘Bash on Regardless’ लिखी थी, जिसमें उन्होंने बसंतार की लड़ाई का वर्णन किया था।
  8. बसंतार की लड़ाई भारतीय सेना द्वारा लड़ी गई सबसे बड़ी जमीनी लड़ाइयों में से एक थी।
  9. उनके नेतृत्व में, सैनिकों को 196 वीरता पुरस्कार और 2 परमवीर चक्र (स्वर्गीय द्वितीय लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल उनमें से एक थे) और 9 महावीर चक्र (ऑपरेशन ब्लू स्टार से प्रसिद्धि पाने वाले स्वर्गीय जनरल वैद्य उनमें से एक थे) प्राप्त हुए।

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आशा भोसले को ‘महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया

महान गायिका आशा भोसले को वर्ष 2020 के लिए ‘महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार’ (Maharashtra Bhushan Award) प्रदान किया जाएगा। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, उप-मुख्यमंत्री अजित पवार और संस्कृति मंत्री अमित देशमुख की एक समिति ने इस संबंध में एक बैठक की।

महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार (Maharashtra Bhushan Award)

यह महाराष्ट्र का सर्वोच्च और सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार है, यह महाराष्ट्र सरकार द्वारा वार्षिक रूप से प्रदान किया जाता है। यह पुरस्कार पहली बार वर्ष 1995 में प्रदान का गया था। शुरू में यह पुरस्कार साहित्य, कला, खेल व विज्ञान के क्षेत्रों में प्रदान किया जाता था, अब इसमें सामाजिक कार्य, पत्रकारिता, लोक प्रशासन और स्वास्थ्य सेवा को भी शामिल किया गया है। इस पुरस्कार उपरोक्त क्षेत्रों में विशेष उपलब्धि के लिए प्रदान किया जाता है। इस पुरस्कार के तहत 10 रुपये की नकद राशि प्रदान की जाती है। इसके लिए विजेताओं का चयन महाराष्ट्र सरकार द्वारा गठित समिति द्वारा किया जाता है।

आशा भोंसले (Asha Bhosle)

आशा भोंसले भारत की महान गायिका हैं, उनका जन्म 8 सितम्बर, 1933 को हुआ था। उन्हें हिंदी सिनेमा में उनके पाशर्वगायन के लिए जाना जाता है। उनके वर्ष 2002 में दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा उन्हें पद्मविभूषण पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

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