व्यक्तिविशेष करेंट अफेयर्स

कन्नड़ अभिनेता संचारी विजय (Sanchari Vijay) का निधन

14 जून, 2021 को प्रसिद्ध कन्नड़ अभिनेता संचारी विजय की सड़क दुर्घटना में मौत हो गयी है। वे 38 वर्ष के थे। उनके निधन पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री समेत कई गणमान्य लोगों ने शोक व्यक्त किया है। उनके निधन के बाद उनके परिवार ने उनके अंगो को दान करने का निर्णय लिया है।

संचारी विजय (Sanchari Vijay)

संचारी विजय (Sanchari Vijay) का जन्म 1983 में कर्नाटक के चिकमंगलूर में हुआ था। उन्होंने अपने करियर में मुख्य रूप से कन्नड़ सिनेमा में कार्य किया, इसके अलावा उन्होंने कई तमिल, तेलुगु और हिंदी फिल्मों में भी कार्य किया है। विजय ने अपने करियर के शुरुआत वर्ष 2011 में रंगप्पा होगबितना फिल्म से की थी। उनकी कुछ एक प्रसिद्ध फ़िल्में इस प्रकार हैं : रामा रामा रघु रामा, दसवाला, हरिवु, ओग्गाराने, नानू अवन्ल्ला अवलू, किलिंग वीरप्पन, सिनेमा माय डार्लिंग, सिपाही, रिक्त, अलमा, नान मागले हीरोइन, वर्मान, अव्यक्त, कृष्ण तुलसी, अदुवु गोम्बे, जेंटलमैन इत्यादि।

नानू अवन्ल्ला अवलू में उन्हें एक ट्रांसजेंडर की भूमिका निभाने के लिए 62वें नेशनल फिल्म अवार्ड में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

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भारतीय मूल की पत्रकार मेघा राजगोपालन (Megha Rajagopalan) ने जीता पुलित्ज़र पुरस्कार 2021

हाल ही में भारतीय मूल की पत्रकार मेघा राजगोपालन, एलिसन किलिंग और क्रिस ब्रुशेक ने पुलित्ज़र पुरस्कार 2021 जीता। उन्हें यह पुरस्कार चीन के शिन्झियांग प्रांत में उइगर मुसलमानों के लिए बनाये गये डिटेंशन कैम्पस की जानकारी दुनिया तक पहुंचाने के  लिए यह पुरस्कार दिया गया है।

चीन में उइगरों की स्थिति

चीन ने शिनजियांग प्रांत में उइगर और अन्य तुर्क मुसलमानों को नियंत्रित करने के लिए अपने प्रयासों को तेज कर दिया है। इसके लिए चीन ने कई प्रकार के कार्यक्रम शुरू किये हैं, इसमें महिलाओं की नसबंदी, शिविरों में बड़े पैमाने पर इंटर्नशिप, ज़बरन श्रम कार्यक्रम, व्यापक तकनीकी और मानव निगरानी इत्यादि शामिल हैं। हालांकि, चीन इन सभी आरोपों को खारिज करता है। चीन का तर्क है कि ये शिविर व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र हैं जो धार्मिक अतिवाद का मुकाबला करने के लिए आवश्यक हैं।

पुलित्ज़र पुरस्कार (Pulitzer Prize)

पुलित्ज़र पुरस्कार अमेरिका में अख़बार, मैगज़ीन, ऑनलाइन पत्रकारिता, साहित्य और संगीत के लिए दिया जाता है। इसकी स्थपाना 1917 में की गयी थी। यह पुरस्कार 21 श्रेणियों में दिया जाता है। प्रत्येक विजेता को एक प्रमाण पत्र और 15,000 डॉलर इनामस्वरुप दिए जाते हैं। इस पुरस्कार का नाम जोसफ पुलित्ज़र के नाम पर रखा गया है, वे एक अमेरिकी समाचार प्रकाशक थे।

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प्रसिद्ध न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अशोक पनगढ़िया (Dr. Ashok Panagariya) का निधन

हाल ही में सुप्रसिद्ध न्यूरोलॉजिस्ट और पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित डॉ. अशोक पनगढ़िया (Dr. Ashok Panagariya) का कोविड-19 जटिलताओं के कारण निधन हो गया। डॉ. पनगढ़िया 71 वर्ष के थे।

मुख्य बिंदु

डॉ. अशोक पनगढ़िया  पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे, वे पिछले कई दिनों से एक निजी अस्पताल में वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे। पिछले दो दिनों में उनकी हालत बिगड़ी और आज उनका निधन हो गया। उनके निधन पर राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने शोक व्यक्त किया है।

डॉ. अशोक पनगढ़िया ने जयपुर की Rajasthan University of Health Sciences के कुलपति और राजस्थान सरकार के योजना बोर्ड के सदस्य सहित कई शीर्ष पदों पर कार्य किया।

डॉ. अशोक पनगढ़िया (Dr. Ashok Panagariya)

डॉ. अशोक पनगढ़िया भारत के एक प्रसिद्ध न्यूरोलॉजिस्ट, मेडिकल शोधकर्ता और शिक्षाविद थे। उनका जन्म वर्ष 1950 में जयपुर, राजस्थान में हुआ था। उन्होंने वर्ष 1972 में MBBS के पढ़ाई पूरी की। उसके बाद उन्होंने न्यूरोलॉजी विषय में भी अध्ययन किया। वे सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज में न्यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख रहे, बाद में वे इस संस्थान के प्रिंसिपल भी रहे।

डॉ. अशोक पनगढ़िया भारतीय रक्षा बलों के मानद न्यूरोलॉजिस्ट थे। वे ‘दिशा’ नामक NGO के चेयरमैन भी थे।

वह चिकित्सा श्रेणी में भारत के सर्वोच्च पुरस्कार डॉ. बी.सी. रॉय पुरस्कार (Dr. B C Roy Award) के प्राप्तकर्ता थे। डॉ. अशोक पनगढ़िया को 2014 में भारत सरकार द्वारा चौथे सर्वोच्च भारतीय नागरिक पुरस्कार पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। राजस्थान सरकार ने 1992 में उन्हें मेरिट पुरस्कार से सम्मानित किया था। इसके अलावा मेडिकल क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें यूनेस्को अवार्ड से भी सम्मानित किया गया था। जबकि टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने उन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया था।

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मार्गरिटा हैक (Margherita Hack) कौन हैं?

हाल ही में गूगल ने इतालवी खगोलशास्त्री मार्गरिटा हैक के 99वें जन्मदिन पर उनके सम्मान एक डूडल बनाया। गौरतलब है कि ‘8558 हैक’ खुद्रग्रह का नाम मार्गरिटा हैक के नाम  पर रखा गया है।

मार्गरिटा हैक

मार्गरिटा हैक का जन्म 12 जून, 1922 को इटली के फ्लोरेंस में हुआ था। उन्होंने 1945 में यूनिवर्सिटी ऑफ़ फ्लोरेंस से भौतिक शास्त्र स्नातक की पढ़ाई की। वे 1964 से लेकर 1 नवम्बर, 1992 तक त्रिएस्ते विश्विद्यालय में खगोलशास्त्र की प्रोफेसर रहीं। वे  Trieste Astronomical Observatory की पहली इटालियन महिला प्रशासक भी रहीं। वे 1985 से 1991 तक  त्रिएस्ते विश्विद्यालय में खगोलविज्ञान विभाग की निदेशक भी रहीं।

वर्ष 1978 में मार्गरिटा हैक ने L’Astronomia  नामक पत्रिका शुरू की, जो पहली बार नवम्बर, 1979 में प्रकाशित हुई।

अपने जीवनकाल में उन्होंने कई अमेरिकी और यूरोपीय वेधशालाओं में कार्य किया, इसके अलावा वे NASA और ESA के वर्किंग ग्रुप्स की सदस्य भी रहीं। उन्होंने कई अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में शोध पत्र भी प्रकाशित किये। 1994 में उन्हें Targa Giuseppe Piazzi पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जबकि 1995 में उन्हें  Cortina Ulisse Prize से सम्मानित किया गया।

 

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डेविड डिओप (David Diop) ने जीता अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार 2021 (International Booker Prize 2021)

हाल ही में फ़्रांसिसी लेखक डेविड डिओप (David Diop) ने अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार 2021 जीता, वे इस पुरस्कार को जीतने वाले पहले फ़्रांसिसी व्यक्ति बन गये हैं। उन्हें उनकी पुस्तक “At Night All Blood is Black” के लिए दिया गया है। इस किताब का अंग्रेजी में अनुवाद एना मोश्कोवाकिस (Anna Moschovakis) द्वारा किया गया है। इस पुरस्कार की इनामी राशि 50,000 पौंड लेखक और अनुवादक के बीच बांटी जाएगी।

मुख्य बिंदु

“At Night All Blood is Black” एक उपन्यास है, जिसमे प्रथम विश्व युद्ध में फ्रांस की ओर से लड़ने वाले सेनेगल के एक सैनिक अल्फ़ा नदियाये (Alfa Ndiaye) पर आधारित है। यह पुस्तक 2018 में फ़्रांसिसी भाषा में प्रकाशित हुई थी, बाद में 2020 में यह अंग्रेजी में प्रकाशित हुई।

अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार (International Booker Prize)

अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार को पहले मैन बुकर अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार कहा जाता था। मैन बुकर अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार पहली बार वर्ष 2005 में दिया गया था, यह पुरस्कार अंग्रेजी भाषा में अनुदित सर्वश्रेष्ठ पुस्तक को प्रदान किया जाता है और यूके या आयरलैंड में प्रकाशित किया जाता है। इसका उद्देश्य दुनिया भर से अंतरराष्ट्रीय कथा साहित्य के अधिक प्रकाशन और पढ़ने को प्रोत्साहित करना और अनुवादकों के काम को बढ़ावा देना है। इस अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार को वर्ष 2019 तक मैन बुकर अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार के नाम से जाना जाता था।

बुकर पुरस्कार (Booker Prize)

बुकर पुरस्कार (Booker Prize) और अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार (International Booker Prize) दो अलग-अलग पुरस्कार हैं। अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार अंग्रेजी में अनुवाद की गयी पुस्तक व यूनाइटेड किंगडम और आयरलैंड में प्रकाशित पुस्तक के लिए दिया जाता है। जबकि बुकर पुरस्कार अंग्रेजी भाषा में लिखे गये सर्वश्रेष्ठ उपन्यास और यूनाइटेड किंगडम और आयरलैंड में प्रकाशित उपन्यास को दिया जाता है। बुकर पुरस्कार पहली बार वर्ष 1969 में दिया गया था।

 

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हांगकांग की त्सांग यिन-हंग (Tsang Yin-hung) ने एवरेस्ट की सबसे तेज चढ़ाई का रिकॉर्ड तोड़ा

हांगकांग की पर्वतारोही त्सांग यिन-हंग (Tsang Yin-hung) ने केवल 26 घंटों में “एक महिला द्वारा दुनिया की सबसे तेज एवरेस्ट चढ़ाई” दर्ज की।

मुख्य बिंदु

  • त्सांग ने अपने तीसरे प्रयास में 25 घंटे 50 मिनट के रिकॉर्ड समय में 8,848.86 मीटर की चढ़ाई की।
  • इससे पहले 2017 में, त्सांग शीर्ष पर चढ़ने वाली पहली हांगकांग की महिला बनीं थीं।
  • उन्होंने नेपाली महिला फुंजो झांगमु लामा (Phunjo Jhangmu Lama) के 39 घंटे 6 मिनट में चढ़ाई पूरी करने का पिछला रिकॉर्ड तोड़ा।

माउंट एवरेस्ट (Mount Everest)

विश्व में समुद्र तल से सबसे ऊँचा पर्वत, हिमालय के महालंगुर हिमाल (Mahalangur Himal) उप-श्रेणी में स्थित है। चीन-नेपाल सीमा इसके शिखर बिंदु से होकर गुजरती है। इसकी बर्फ की ऊंचाई 8,848.86 मीटर है जो हाल ही में 2020 में नेपाली और चीनी अधिकारियों द्वारा दर्ज की गई थी।

माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई

माउंट एवरेस्ट एक प्रसिद्ध चढ़ाई स्थल है जो अनुभवी पर्वतारोहियों को आकर्षित करता है। इसके दो मुख्य चढ़ाई मार्ग हैं। एक नेपाल में दक्षिण-पूर्व से है जिसे “मानक मार्ग” कहा जाता है जबकि दूसरा तिब्बत में उत्तर से है। यह पर्वत मौसम, हवाएं, ऊंचाई की बीमारी (altitude sickness) और हिमस्खलन और खुंबू हिमपात सहित खतरे प्रस्तुत करता है। एवरेस्ट पर 2019 तक लगभग 300 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से कई शव पहाड़ पर ही पड़े हैं।

महालंगुर हिमाल (Mahalangur Himal)

यह पूर्वोत्तर नेपाल और चीन के दक्षिण-मध्य तिब्बत पर हिमालय का एक उपखंड है। यह रोलवलिंग हिमाल (Rolwaling Himal) और चो ओयू (Cho Oyu) के बीच नंगपा ला दर्रे (Nangpa La pass) से फैला हुआ है। इस श्रेणी में माउंट एवरेस्ट, ल्होत्से, मकालू और चो ओयू शामिल हैं जो पृथ्वी की छह सबसे ऊंची चोटियों में से चार हैं।

 

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