विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स

नासा का इन्जेन्यूटी (Ingenuity) हेलीकॉप्टर 14 अप्रैल के बाद मंगल गृह पर पहली उड़ान का प्रयास करेगा

नासा का इन्जेन्यूटी (Ingenuity) मार्स हेलीकॉप्टर अब 14 अप्रैल के बाद अपनी पहली उड़ान भरने का प्रयास करेगा। इस पहले इन्जेन्यूटी 11 अप्रैल को मंगल ग्रह पर उड़ान भरने वाला था, परन्तु कुछ तकनीकी कारणों से इसमें अब देरी की गयी है। पहली उड़ान के साथ, इन्जेन्यूटी दूसरे ग्रह में उड़ान भरने वाला पहला नियंत्रित विमान बनने का इतिहास बनाएगा।

इन्जेन्यूटी हेलीकाप्टर (Ingenuity Helicopter)

  • इन्जेन्यूटी दूसरे ग्रह में संचालित उड़ान का एक प्रौद्योगिकी प्रदर्शन है।
  • नासा इन्जेन्यूटी हेलीकॉप्टर की मदद से परीक्षण उड़ानों का प्रदर्शन करेगा।
  • इन्जेन्यूटी हेलीकाप्टर की मुख्य चुनौती यह है कि इसे -130 डिग्री फ़ारेनहाइट के कम तापमान में जीवित रहना होगा। इस तरह के कम तापमान इस क्राफ्ट पर बैटरियों को फ्रीज और क्रैक कर सकते हैं।
  • इस हेलीकॉप्टर का वजन 8 किलोग्राम है।
  • यह एक सौर ऊर्जा संचालित हेलीकाप्टर है।
  • हेलीकॉप्टर की पूर्ण गति 2,400 आरपीएम है।
  • मार्स 2020 मिशन के एक भाग के रूप में पेरसेवेरांस रोवर द्वारा इन्जेंयुटी हेलीकॉप्टर को मंगल ग्रह की सतह पर रखा गया था।

पेरसेवेरांस रोवर (Perseverance Rover)

  • पेरसेवेरांस रोवर एक खगोल विज्ञान मिशन है।इस मिशन का उद्देश्य मंगल में प्राचीन माइक्रोबियल जीवन के संकेतों को खोजना है।
  • मंगल ग्रह की चट्टान और रेजोलिथ (टूटी हुई चट्टान और धूल) को इकट्ठा करने के लिए पेरसेवेरांस पहला मिशन है।
  • इससे पहले ‘क्यूरोसिटी’ रोवर मंगल ग्रह पर भेजा गया था।
  • इस रोवर में सात पेलोड इंस्ट्रूमेंट्स, दो माइक्रो फोन और 19 कैमरे हैं।
  • यह मंगल ग्रह मिट्टी को ड्रिल करेगा और मंगल की चट्टानों के मुख्य नमूने एकत्र करेगा।

मार्स 2020 मिशन (Mars 2020 Mission)

मार्स 2020 मिशन जुलाई 2020 में लांच किया गया था। यह नासा के मंगल अन्वेषण कार्यक्रम का एक हिस्सा है। मार्स 2020 मिशन को एटलस वी लॉन्च वाहन (Atlas V Launch Vehicle) से लॉन्च किया गया था।

यह 2020 में मंगल ग्रह के लिए लॉन्च किए गए तीन मिशनों में से एक है। अन्य दो मंगल मिशन इस प्रकार थे:

  • तियानवेन-1 मिशन चीन द्वारा लांच किया गया था।
  • यूएई द्वारा ‘होप ऑर्बिटर’ को लांच किया गया था।

Month:

नासा का इन्जेन्यूटी हेलीकॉप्टर मंगल गृह पर पहली उड़ान का प्रयास करेगा

नासा का इन्जेन्यूटी मार्स हेलीकॉप्टर अपनी पहली उड़ान भरने जा रहा है। इसके साथ, इन्जेन्यूटी दूसरे ग्रह में उड़ान भरने वाला पहला नियंत्रित विमान बनने का इतिहास बनाएगा।

इन्जेन्यूटी हेलीकाप्टर (Ingenuity Helicopter)

  • इन्जेन्यूटी दूसरे ग्रह में संचालित उड़ान का एक प्रौद्योगिकी प्रदर्शन है।
  • नासा इन्जेन्यूटी हेलीकॉप्टर की मदद से परीक्षण उड़ानों का प्रदर्शन करेगा।
  • इन्जेन्यूटी हेलीकाप्टर की मुख्य चुनौती यह है कि इसे -130 डिग्री फ़ारेनहाइट के कम तापमान में जीवित रहना होगा। इस तरह के कम तापमान इस क्राफ्ट पर बैटरियों को फ्रीज और क्रैक कर सकते हैं।
  • इस हेलीकॉप्टर का वजन 8 किलोग्राम है।
  • यह एक सौर ऊर्जा संचालित हेलीकाप्टर है।
  • हेलीकॉप्टर की पूर्ण गति 2,400 आरपीएम है।
  • मार्स 2020 मिशन के एक भाग के रूप में पेरसेवेरांस रोवर द्वारा इन्जेंयुटी हेलीकॉप्टर को मंगल ग्रह की सतह पर रखा गया था।

पेरसेवेरांस रोवर (Perseverance Rover)

  • पेरसेवेरांस रोवर एक खगोल विज्ञान मिशन है।इस मिशन का उद्देश्य मंगल में प्राचीन माइक्रोबियल जीवन के संकेतों को खोजना है।
  • मंगल ग्रह की चट्टान और रेजोलिथ (टूटी हुई चट्टान और धूल) को इकट्ठा करने के लिए पेरसेवेरांस पहला मिशन है।
  • इससे पहले ‘क्यूरोसिटी’ रोवर मंगल ग्रह पर भेजा गया था।
  • इस रोवर में सात पेलोड इंस्ट्रूमेंट्स, दो माइक्रो फोन और 19 कैमरे हैं।
  • यह मंगल ग्रह मिट्टी को ड्रिल करेगा और मंगल की चट्टानों के मुख्य नमूने एकत्र करेगा।

मार्स 2020 मिशन (Mars 2020 Mission)

मार्स 2020 मिशन जुलाई 2020 में लांच किया गया था। यह नासा के मंगल अन्वेषण कार्यक्रम का एक हिस्सा है। मार्स 2020 मिशन को एटलस वी लॉन्च वाहन (Atlas V Launch Vehicle) से लॉन्च किया गया था।

यह 2020 में मंगल ग्रह के लिए लॉन्च किए गए तीन मिशनों में से एक है। अन्य दो मंगल मिशन इस प्रकार थे:

  • तियानवेन-1 मिशन चीन द्वारा लांच किया गया था।
  • यूएई द्वारा ‘होप ऑर्बिटर’ को लांच किया गया था।

 

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NanoSniffer : माइक्रोसेन्सर आधारित विस्फोटक ट्रेस डिटेक्टर

केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने हाल ही में दुनिया का पहला माइक्रोसेन्सर आधारित विस्फोटक ट्रेस डिटेक्टर लॉन्च किया, जिसे “NanoSniffer” कहा गया।

NanoSniffer

  • NanoSniffer को IIT बॉम्बे द्वारा इनक्यूबेटेड स्टार्टअप द्वारा विकसित किया गया था जिसे NanoSniff Technologies कहा जाता है।इसकी मार्केटिंग IIT दिल्ली द्वाराइनक्यूबेटेड स्टार्टअप Kritikal Solutions द्वारा की जाती है।
  • NanoSniffer 10 सेकंड से भी कम समय में विस्फोटक का पता लगा सकता है।
  • यह सैन्य, घरेलू और पारंपरिक विस्फोटकों का पता लगा सकता है।
  • यह MEMS सिस्टम का उपयोग करता है। MEMS का अर्थ Micro-Electromechanical System है।
  • यह विस्फोटक की नैनो ग्राम मात्रा का भी पता लगा सकता है।
  • इस डिवाइस की कीमत 10 लाख रुपये है। यह मौजूदा उपकरणों की कीमत का एक तिहाई है।
  • इसका यूरोप, भारत और अमेरिका में पेटेंट कराया गया है।

भारत में पेटेंट

  • नैनो टेक्नोलॉजी के रूप में कई और प्रौद्योगिकी पेटेंट भारत में आने चाहिए। भारत में 300 शोध पत्रों में से केवल एक का पेटेंट कराया जाता है। दूसरी ओर, अमेरिका में, पांच शोध पत्रों में से एक का पेटेंट कराया गया है। इस परिदृश्य को बदलने के लिए, अधिक शैक्षणिक संस्थान समर्थित इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित किए जाने चाहिए।
  • इनक्यूबेशन सेंटर को विकास और परिवर्तन के शुरुआती चरणों के माध्यम से नए और छोटे व्यवसायों को विकसित करने के लिए डिज़ाइन किया जाता है।

नैनोस्निफर का महत्व

ग्लोबल एक्सप्लोसिव ट्रेस डिटेक्टर उद्योग का मूल्य 10,000 करोड़ रुपये आंका गया है। इस उद्योग में भारत का हिस्सा केवल 2% से 3% है। NanoSniffer को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मार्केट किया जायेगा और इस तरह यह भारतीय विस्फोटक विस्फोटक डिटेक्टर उद्योग के विकास में मदद करेगा।

विस्फोटक ट्रेस डिटेक्शन (Explosive Trace Detection)

एक्सप्लोसिव ट्रेस डिटेक्शन छोटी परिमाण के विस्फोटकों का पता लगाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक है। एक्सप्लोसिव ट्रेस डिटेक्शन की तीन मुख्य विशेषताएं संवेदनशीलता, हल्का वजन और आकार हैं। NanoSniffer विस्फोटक की नैनो मात्रा का भी पता लगा सकता है।

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 Xenobots : मेंढकों की स्टेम कोशिकाओं से रोबोट बनाये गये

वैज्ञानिकों ने नए जीवित रोबोट बनाने के लिए मेंढकों की स्टेम कोशिकाओं का उपयोग किया है। इन रोबोटों को ज़ेनोबॉट्स (Xenobots) नाम दिया गया है।

Xenobots

  • Xenobots खुद को ठीक करने में सक्षम हैं।
  • वे यादें रिकॉर्ड कर सकते हैं।
  • Xenobots मेंढक कोशिकाओं से बने होते हैं।उनका नाम ज़ेनोपस लाविस मेंढक (Xenopus laevis frog) के नाम पर रखा गया है जिन्होंने रोबोट बनाने के लिए कोशिकाओं की आपूर्ति की। ज़ेनोपस लाविस एक अफ्रीकी मेंढक है।
  • इन रोबोटों का उपयोग बीमारियों का पता लगाने और शरीर के विशिष्ट क्षेत्रों में दवाओं को पहुंचाने के लिए किया जायेगा।
  • Xenobots 1 मिली मीटर से कम लंबे होते हैं।
  • इनमें 500-1000 जीवित कोशिकाएँ शामिल हैं।
  • वे सामूहिक रूप से कार्य करने के लिए एक साथ जुड़ने में सक्षम हैं।
  • वे अपनी कोशिकीय ऊर्जा का अधिकतम दस दिनों तक दोहन करके छोटी वस्तुओं को स्थानांतरित कर सकते हैं।

Xenobots की स्मृति कैसे बनाई गई थी?

  • ज़ेनोबोट्स की स्मृति रखने की क्षमता को EosFP नामक एक प्रोटीन द्वारा प्रेरित किया गया था।यह प्रोटीन सामान्य रूप से हरा होता है। हालाँकि, यह 390 एनएम तरंग दैर्ध्य के प्रकाश के संपर्क में आने पर लाल रंग का उत्सर्जन करता है।
  • मेसेंजर आरएनए कोडिंग के साथ मेंढक भ्रूण की कोशिकाओं ने Xenobots को रिकॉर्ड करने में सक्षम किया जब नीली रोशनी (लगभग 390 एनएम की तरंग दैर्ध्य) के संपर्क में आया।

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इन्जेन्यूटी हेलीकाप्टर (Ingenuity Helicopter) क्या है?

नासा ने हाल ही में घोषणा की कि उसके इन्जेन्यूटी हेलीकाप्टर को मंगल की सतह पर सफलतापूर्वक रख दिया गया  है और वह अपनी पहली उड़ान की तैयारी में है।

इन्जेन्यूटी हेलीकाप्टर (Ingenuity Helicopter)

  • इन्जेन्यूटी दूसरे ग्रह में संचालित उड़ान का एक प्रौद्योगिकी प्रदर्शन है।
  • नासा इन्जेन्यूटी हेलीकॉप्टर की मदद से परीक्षण उड़ानों का प्रदर्शन करेगा।
  • इन्जेन्यूटी हेलीकाप्टर की मुख्य चुनौती यह है कि इसे -130 डिग्री फ़ारेनहाइट के कम तापमान में जीवित रहना होगा। इस तरह के कम तापमान इस क्राफ्ट पर बैटरियों को फ्रीज और क्रैक कर सकते हैं।
  • इस हेलीकॉप्टर का वजन 8 किलोग्राम है।
  • यह एक सौर ऊर्जा संचालित हेलीकाप्टर है।
  • हेलीकॉप्टर की पूर्ण गति 2,400 आरपीएम है।
  • मार्स 2020 मिशन के एक भाग के रूप में पेरसेवेरांस रोवर द्वारा इन्जेंयुटी हेलीकॉप्टर को मंगल ग्रह की सतह पर रखा गया था।

पेरसेवेरांस रोवर (Perseverance Rover)

  • पेरसेवेरांस रोवर एक खगोल विज्ञान मिशन है।इस मिशन का उद्देश्य मंगल में प्राचीन माइक्रोबियल जीवन के संकेतों को खोजना है।
  • मंगल ग्रह की चट्टान और रेजोलिथ (टूटी हुई चट्टान और धूल) को इकट्ठा करने के लिए पेरसेवेरांस पहला मिशन है।
  • इससे पहले ‘क्यूरोसिटी’ रोवर मंगल ग्रह पर भेजा गया था।
  • इस रोवर में सात पेलोड इंस्ट्रूमेंट्स, दो माइक्रो फोन और 19 कैमरे हैं।
  • यह मंगल ग्रह मिट्टी को ड्रिल करेगा और मंगल की चट्टानों के मुख्य नमूने एकत्र करेगा।

मार्स 2020 मिशन (Mars 2020 Mission)

मार्स 2020 मिशन जुलाई 2020 में लांच किया गया था। यह नासा के मंगल अन्वेषण कार्यक्रम का एक हिस्सा है। मार्स 2020 मिशन को एटलस वी लॉन्च वाहन (Atlas V Launch Vehicle) से लॉन्च किया गया था।

यह 2020 में मंगल ग्रह के लिए लॉन्च किए गए तीन मिशनों में से एक है। अन्य दो मंगल मिशन इस प्रकार थे:

  • तियानवेन-1 मिशन चीन द्वारा लांच किया गया था।
  • यूएई द्वारा ‘होप ऑर्बिटर’ को लांच किया गया था।

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एडवांस्ड चाफ टेक्नोलॉजी (Advanced Chaff Technology) क्या है?

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने हाल ही में मिसाइल हमलों के खिलाफ नौसेना के जहाजों की सुरक्षा के लिए एक उन्नत चाफ टेक्नोलॉजी विकसित की है। जोधपुर में स्थित डीआरडीओ प्रयोगशालाओं में से एक ने उन्नत चाफ प्रौद्योगिकी के तीन प्रकार विकसित किए। वे शॉर्ट रेंज चैफ रॉकेट, लॉन्ग रेंज चैफ रॉकेट और मीडियम रेंज चैफ रॉकेट हैं।

प्रौद्योगिकी की मुख्य विशेषताएं

  • चाफ तकनीक का उपयोग दुनिया भर में नौसेना के जहाजों में दुश्मन के रडार और रेडियो फ्रीक्वेंसी मिसाइल सीकर के खिलाफ आत्मरक्षा के लिए किया जाता है।
  • DRDO द्वारा विकसित एडवांस चाफ टेक्नोलॉजी का सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि यह दुश्मन की मिसाइलों को डिफ्लेक्ट करने के लिए बहुत कम चाफ मैटेरियल का उपयोग करती है।
  • प्रौद्योगिकी अब बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए तैयार है।

चाफ (Chaff)

  • चाफ को मूल रूप से ‘विंडो’ कहा जाता है।दूसरे विश्व युद्ध के युग में चाफ का उपयोग करने का विचार उत्पन्न हुआ था।
  • यह मूल रूप से एक रेडियो फ्रीक्वेंसी काउंटरमेजर है।
  • इसमें एल्यूमीनियम लेपित ग्लास फाइबर होते हैं जिनकी लंबाई 75 सेंटीमीटर से 0.8 सेंटीमीटर तक होती है।वे 100 मिलियन के फाइबर के पैकेट में जारी किए जाते हैं।
  • अधिकांश आधुनिक सशस्त्र बल चाफ का उपयोग मिसाइलों को लक्ष्य से भटकाने के लिए करते हैं।
  • युद्धपोत आत्मरक्षा के लिए चाफ का उपयोग करते हैं।

DRDO द्वारा हालिया विकास

  • मार्च 2021 में, UXOR (Unexploded Ordnance Handling Robot) ने अपने यूजर ट्रायल को पूरा किया।UXOR को भारतीय वायु सेना और भारतीय सेना के लिए विकसित किया गया था। यह 1000 किलोग्राम आयुध को संभाल सकता है।
  • मार्च 2021 में, NMRL ने स्वदेशी वायु स्वतंत्र प्रणोदन प्रणाली के सफल परीक्षण किए।
  • DRDO द्वारा विकसित सिंधु नेत्रा उपग्रह को 28 फरवरी, 2021 को अंतरिक्ष में तैनात किया गया था। इस उपग्रह का मुख्य उद्देश्य भारत की निगरानी क्षमता को बढ़ावा देना और हिंद महासागर क्षेत्र में सैन्य युद्धपोतों और मर्चेंट शिपिंग की निगरानी करना है।

 

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