विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स

भारतीय वायुसेना ने किया आकाश मिसाइल का परीक्षण

हाल ही में भारतीय वायुसेना ने आकाश मिसाइलों का परीक्षण किया। गौरतलब है कि यह परीक्षण भारत-चीन सीमा विवाद के बीच किया गया है। इससे पहले भारत ने पिछले कुछ महीनों में कई  मिसाइलों का परीक्षण किया है। इस परीक्षण के दौरान 10 आकाश मिसाइलें दागी गयी। आकाश मिसाइल आकाश मिसाइल छोटी दूरी की सतह-से-हवा

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अरेसिबो टेलिस्कोप : मुख्य तथ्य

प्यूर्टो रिको के अरेसिबो टेलीस्कोप को 1963 में बनाया गया था। यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सिंगल-डिश रेडियो टेलीस्कोप है। यह हाल ही में ढहने के कारण खबरों में था। वर्तमान में इसका स्वामित्व यूएस नेशनल साइंस फाउंडेशन के पास है। इसने कई महत्वपूर्ण खोजें की हैं, इस टेलिस्कोप ने यह पता लगाया था कि बुध 59

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राकेट बनाने में अग्निकुल कॉसमॉस की सहायता करेगा इसरो

निजी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, चेन्नई स्थित रॉकेट स्टार्टअप अग्निकुल कॉसमॉस की मदद करेगा। यह कंपनी को अपने छोटे रॉकेट का परीक्षण करने में मदद करेगा, यह राकेट 100 किलोग्राम के उपग्रह को निम्न पृथ्वी की कक्षा में ले जा सकता है। अग्निकुल कॉसमॉस एक निजी अन्तरिक्ष कंपनी है, इसकी

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इमरजेंसी यूज ऑथराइजेशन क्या है?

हाल ही में, कई दवा निर्माता COVID-19 वैक्सीन के लिए आपातकालीन उपयोग प्राधिकरण (Emergency Use Authorization) की मांग कर रहे हैं। फाइजर ने यू.के. में आपातकालीन उपयोग प्राधिकरण के लिए आवेदन किया था और यू.के. की मेडिसिन्स एंड हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स रेगुलेटरी एजेंसी द्वारा इसे मंज़ूरी भी दी गयी है। इसके अलावा सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और मॉडर्ना

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इसरो को सौंपा गया C32 LH2 प्रोपेलेंट टैंक, जानिए यह इसरो के किस काम आएगा?

C32 LH2 प्रोपेलेंट टैंक में सुर्ख़ियों में था। दरअसल, C32 LH2, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा बनाया गया सबसे बड़ा क्रायोजेनिक प्रोपेलेंट टैंक है।  हाल ही में यह टैंक इसरो को डिलीवर किया गया। इसे इसरो के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल मार्क III (GSLV Mk III) की पेलोड क्षमता को 4 टन से बढ़ाकर 6 टन करने

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ऑस्ट्रेलियन स्क्वायर किलोमीटर एरे पाथफाइंडर : मुख्य तथ्य

ऑस्ट्रेलियन स्क्वायर किलोमीटर एरे पाथफाइंडर (ASKAP) एक नए प्रकार का रेडियो टेलिस्कोप है जिसे कॉमनवेल्थ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (CSIRO) द्वारा विकसित किया गया है। यह 36 छोटे डिश एंटेना के संकेतों को मिलाकर हाई-रिज़ॉल्यूशन छवियां बनाता है। हाल ही में, इस टेलीस्कोप ने ‘ब्रह्मांड के नए एटलस’ को बनाने के लिए लगभग 300 घंटों में

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