कोरोनावायरस

केंद्र सरकार ने कोरोनावायरस संक्रमण वाले बच्चों में रेमडेसिविर (Remdesivir) के इस्तेमाल पर रोक लगाई

हाल ही में केंद्र सरकार ने कोरोनावायरस से संक्रमित बच्चों में रेमडेसिविर के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। दरअसल हाल ही में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) ने 18 साल से कम उम्र के बच्चों में कोविड-19 के प्रबंधन के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

इसके अलावा, पांच साल से कम उम्र के बच्चों को अब मास्क पहनने की आवश्यकता नहीं है।

मुख्य बिंदु

इन नए दिशानिर्देशों में, बच्चों में आपातकालीन उपयोग दवा रेमेडिसविर की सिफारिश नहीं की गई है। DGHS ने कहा है कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में रेमडेसिविर के उपयोग के बारे में पर्याप्त सुरक्षा और प्रभावकारिता डेटा का अभाव है। इसके अतिरिक्त, स्पर्शोन्मुख (asymptomatic) और हल्के मामलों में बच्चों के लिए लैब जांच की आवश्यकता नहीं है। इन जांचों की आवश्यकता केवल मध्यम और गंभीर मामलों में ही होती है।

रेमडेसिविर (Remdesivir)

रेमडेसिविर एक एंटीवायरल दवा है, यह ब्रांड नाम वेक्लरी (Veklury) के तहत बेची जाती है। इसे बायोफर्मासिटिकल कंपनी गिलियड साइंसेज (Gilead Sciences) द्वारा इंजेक्शन के माध्यम से इस्तेमाल करने के लिए विकसित किया गया था। इसे 50 देशों में COVID-19 के इलाज के लिए आपातकालीन उपयोग के लिए अधिकृत किया गया था। हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने नवंबर 2020 में कोविड-19 के इलाज के लिए रेमडेसिविर के इस्तेमाल की सशर्त सिफारिश की थी।

पृष्ठभूमि

रेमडेसिविर को हेपेटाइटिस सी के इलाज के लिए विकसित किया गया था। इसके बाद इबोला वायरस रोग, मारबर्ग वायरस संक्रमण और कोरोनावायरस के लिए भी इसका उपयोग किया गया ।

रेमडेसिविर के साइड इफेक्ट

स्वस्थ स्वयंसेवकों में आम दुष्प्रभाव में शामिल हैं : लीवर एंजाइमों के रक्त स्तर में वृद्धि, लीवर की सूजन, निम्न रक्तचाप, मतली और पसीना आना इत्यादि।

Month:

ब्राज़ील ने भारत बायोटेक की वैक्सीन ‘कोवाक्सिन’ (COVAXIN) को आयात करने के लिए मंज़ूरी दी

ब्राज़ील ने हाल ही में भारतीय वैक्सीन ‘कोवाक्सिन’ के आयात को मंज़ूरी दे दी है। कोवाक्सिन का निर्माण हैदराबाद बेस्ड भारतीय कंपनी भारत बायोटेक द्वारा किया जाता है। इसके लिए ब्राज़ील के राष्ट्रीयस्वास्थ्य एजेंसी ने मंज़ूरी दी।

मुख्य बिंदु

गौरतलब है कि भारत से आयात की जाने वाली इन टीकों का उपयोग विशिष्ट परिस्थितियों में किया जायेगा। फिलहाल ब्राज़ील ने भारत से कोवाक्सिन की 4 मिलियन खुराक आयात करने का फैसला लिया है। इसके अलावा ब्राज़ील ने रूसी वैक्सीन स्पुतनिक-वी के आयात को भी मंज़ूरी दी है।

COVAXIN

COVAXIN भारत बायोटेक द्वारा निर्मित एक सरकारी समर्थित टीका है। इसकी प्रभावकारिता दर 81% है। COVAXIN वैक्सीन के चरण तीन परीक्षणों में 27,000 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया है। COVAXIN दो खुराक में दिया जाता है। खुराक के बीच का समय अंतराल चार सप्ताह है। COVAXIN को मृत COVID-19 वायरस से तैयार किया गया था।

भारत बायोटेक (Bharat Biotech)

यह एक भारतीय बायोटेक्नोलॉजी कंपनी है, इसका मुख्यालय हैदराबाद में है। इसकी स्थापना 1996 में कृष्णा एला द्वारा की गयी थी। इस कंपनी में 700 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं।

Month:

जापान ने COVAX के लिए अतिरिक्त 800 मिलियन डॉलर देने का निर्णय लिया

जापान के प्रधानमंत्री योशीहिदे सुगा (Yoshihide Suga) ने COVAX सुविधा के लिए अतिरिक्त 800 मिलियन डॉलर देने के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त की है।

मुख्य बिंदु

  • COVAX को 800 मिलियन डॉलर के अतिरिक्त अनुदान का उद्देश्य “दुनिया भर में कोरोनावायरस टीकों का उचित वितरण” करना है।
  • यह घोषणा एक “ऑनलाइन वैक्सीन शिखर सम्मेलन” के दौरान की गई थी, जिसे जापान द्वारा GAVI वैक्सीन गठबंधन के साथ आयोजित किया गया था।

ऑनलाइन वैक्सीन समिट (Online Vaccine Summit)

ऑनलाइन वैक्सीन शिखर सम्मेलन में की उपराष्ट्रपति कमला हैरिस (Kamala Harris); संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और अन्य लोगों ने हिस्सा लिया।

COVAX में जापान का योगदान

जापान ने पहले COVAX में 200 मिलियन डॉलर का योगदान दिया था। उन्होंने आगे बताया, COVAX सुविधा के तहत 120 देशों और क्षेत्रों में कोरोनावायरस टीकों की 76 मिलियन खुराक की आपूर्ति की गई है। जापान ने कोरोना वायरस वेरिएंट के प्रसार और वैक्सीन शिपमेंट में देरी पर विचार करने के बाद 30 मिलियन वैक्सीन खुराक की आपूर्ति करने की योजना बनाई है।

COVID-19 Vaccines Global Access (COVAX)

COVID-19 टीकों की समान पहुंच के लिए GAVI वैक्सीन गठबंधन द्वारा COVAX पहल शुरू की गई थी। यह Coalition for Epidemic Preparedness Innovations और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा समर्थित है। यह पहल “Access to COVID-19 Tools Accelerator” पहल के तीन स्तंभों में से एक है, जिसे WHO द्वारा अप्रैल, 2020 में शुरू किया गया था। WHO-अनुमोदित टीके जैसे ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका, मॉडर्ना, फाइजर-बायोएनटेक, सिनोवैक, सिनोफार्म और जॉनसन एंड जॉनसन टीके इस पहल के तहत वितरित किये जा सकते हैं।

Month:

WHO ने भारत में पाए जाने वाले COVID-19 वेरिएंट का नामकरण किया

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने ग्रीक वर्णमाला के चार अक्षरों पर, वैश्विक चिंता के उभरते कोरोनावायरस वेरिएंट को लेबल करने के लिए कई नामों की सिफारिश की है। इसने भारत में पाए जाने वाले B.1.617.2 वेरिएंट को ‘डेल्टा’ नाम दिया है।

मुख्य बिंदु

  • यूके में पाए गये वेरिएंट को ‘अल्फा’ नाम दिया गया है।
  • मौजूदा वैज्ञानिक नामकरण प्रणाली जारी रहेगी, जबकि नए नाम केवल उन देशों में पाए जाने वेरिएंट को दिए जायेंगे, इसमें उन देशों का नाम नहीं जोड़ा जायेगा।

चिंताजनक वेरिएंट (Variants of Concern)

WHO  ने चार चिंताजनक वेरिएंट  B.1.1.7, B.1.351, P2 और B.1.617.2.की पहचान की है। उन्हें क्रमशः ‘अल्फा, बीटा, गामा और डेल्टा’ के रूप में लेबल किया गया है।

Variants of Interest

Variants of Interest विश्व स्तर पर कम व्यापक और पारगम्य थे, जिन्हें ग्रीक नाम भी दिए गए थे। भारत में B.1.617 परिवार से संबंधित B.1.617 वायरस की पहचान की गई, जिसे ‘कप्पा’ नाम दिया गया है।

कोरोनावायरस का भारतीय संस्करण

वायरस B.1.617.2 को यूके में भारतीय संस्करण कहा जाता है। यह केंट संस्करण की तुलना में अधिक तेजी से फैल रहा है, जो सर्दियों के दौरान मामलों में वृद्धि के लिए जिम्मेदार था।इंग्लैंड में बी.1.617.2 वेरिएंट के करीब 8,000 और स्कॉटलैंड में 1,000 मामले सामने आए हैं। यह वेरिएंट इंग्लैंड में बोल्टन, ब्लैकबर्न आदि क्षेत्रों में अधिकांश संक्रमण पैदा कर रहा है। यह केंट संस्करण (बी.1.1.7) की तुलना में अधिक आसानी से फैलता है।

Month:

हैम्स्टर्स में डीएनए टीके प्रभावकारी साबित हुए : अध्ययन

ताइवान के शोधकर्ताओं ने कोरोनावायरस स्पाइक प्रोटीन के डीएनए का उपयोग करके एक टीका विकसित किया और चूहे और हैम्स्टर्स (चूहे की एक प्रजाति) पर इसकी प्रभावकारिता का परीक्षण किया। यह तकनीक mRNA के टीकों से अलग है।

मुख्य बिंदु

  • डीएनए टीकों को आमतौर पर कोशिकाओं में पहुंचाना मुश्किल होता है।लेकिन, नेशनल हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट, ताइवान के शोधकर्ताओं ने डीएनए टीकाकरण के दौरान इलेक्ट्रोपोरेशन को जोड़ा।
  • इस शोध के अनुसार, नए डीएनए वैक्सीन से प्रतिरक्षित चूहों और हैम्स्टर्स ने SARS-CoV-2 स्पाइक प्रोटीन के खिलाफ लंबे समय तक चलने वाले एंटीबॉडी विकसित की।
  • प्रतिरक्षण के आठ सप्ताह बाद एंटीबॉडी अपने चरम पर पहुंच गयी लेकिन 20वें सप्ताह में स्तर अपेक्षाकृत अधिक था।

डीएनए वैक्सीन क्या है? (What is DNA Vaccine?)

डीएनए वैक्सीन थर्मल रूप से स्थिर होता है और ऐसे टीकों में कोल्ड चेन की जरूरत नहीं है। यह SARS-CoV-2 के खिलाफ लंबे समय तक चलने वाले न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडी के उच्च स्तर को प्रेरित कर सकता है। इसे कम लागत में जल्दी तैयार किया जा सकता है। कई नैदानिक ​​परीक्षणों ने जीका, एचआईवी -1, इबोला और इन्फ्लूएंजा वायरस जैसे संक्रमणों के इलाज में डीएनए टीकों की प्रभावकारिता का संकेत दिया है।

mRNA आधारित टीके क्या हैं?

अधिकांश उपलब्ध कोविड-19 टीके mRNA किस्में पर आधारित हैं। इस तरह के टीके मानव प्रतिरक्षा प्रणाली को SARS-CoV-2 वायरस को पहचानना सिखाते हैं।

दोनों टीकों में समानता

डीएनए आधारित और mRNA-आधारित दोनों टीके एक प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया निकालने के लिए वायरस के आनुवंशिक सामग्री एन्कोडिंग भाग का उपयोग करते हैं।

Month:

पशु रोग जोखिम पर सलाह देने के लिए ‘One Health’ पैनल का गठन किया गया

विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) ने तीन अन्य अंतरराष्ट्रीय निकायों के साथ विशेषज्ञों की एक टीम बनाई है जो जानवरों से मनुष्यों में बीमारियों के प्रसार को रोकने के लिए एक वैश्विक योजना विकसित करने में मदद करेगी।

One Health

यह पहल 2020 में फ्रांस और जर्मनी द्वारा शुरू की गई थी, लेकिन मई 2021 में इसकी पहली बैठक हुई। यह पैनल डब्ल्यूएचओ, विश्व पशु स्वास्थ्य, खाद्य और कृषि संगठन और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम को “जोखिम मूल्यांकन और निगरानी ढांचे” विकसित करने की सलाह देगा। और कोविड-19 जैसे जूनोटिक प्रकोपों ​​​​को रोकने और तैयार करने के लिए बेहतर प्रथाओं की स्थापना में मदद करेगा।

पैनल के कार्य

यह पैनल खाद्य उत्पादन और वितरण, शहरीकरण और बुनियादी ढांचे के निर्माण, अंतर्राष्ट्रीय यात्रा और व्यापार और जैव विविधता हानि और जलवायु परिवर्तन के लिए अग्रणी गतिविधियों में संभावित संचरण जोखिमों की निगरानी करेगा।

यह पैनल क्यों स्थापित किया गया था?

इस पैनल का गठन COVID-19 महामारी के प्रकोप की पृष्ठभूमि में किया गया था। ऐसा माना जाता है कि, कोरोनावायरस या SARS-CoV-2 वायरस की उत्पत्ति चीन और दक्षिण पूर्व एशिया में वन्यजीव व्यापार नेटवर्क में हुई थी। चमगादड़ में कोरोना वायरस का सबसे नजदीकी जेनेटिक मैच पाया गया है।

जूनोटिक प्रकोप (Zoonotic Outbreaks) क्या हैं?

जूनोटिक रोग या प्रकोप एक संक्रामक रोग है, जो प्रजातियों के बीच जानवरों से मनुष्यों में या मनुष्यों से जानवरों में फैलता है।

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