भारतीय अर्थव्यवस्था

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 5.271 अरब डॉलर की वृद्धि के साथ 598.165 अरब डॉलर के सर्वोच्च स्तर पर पहुंचा

28 मई, 2021 को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 5.271 अरब डॉलर की वृद्धि के साथ 598.165 अरब डॉलर के सर्वोच्च स्तर पर पहुँच गया है। विश्व में सर्वाधिक विदेशी मुद्रा भंडार वाले देशों की सूची में भारत पांचवे स्थान पर है, इस सूची में चीन पहले स्थान पर है। विदेशी

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S&P : 2021 में भारत की विकास दर 11% रहेगी

S&P Global Ratings ने हाल ही में कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था 2021-22 में 11% की दर से बढ़ेगी। इससे पहले, S&P ने भविष्यवाणी की थी कि भारत 10% की दर से बढ़ेगा। मुख्य बिंदु अगले कुछ वर्षों में, भारत 1% से 6.4% की दर से विकास करेगा। एशिया-प्रशांत बैंकों के लिए ऋण की स्थिति में

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International Monetary Fund ने World Economic Outlook जारी किया

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund) ने हाल ही में विश्व आर्थिक आउटलुक (World Economic Outlook) जारी किया, इस का शीर्षक “Managing Divergent Recoveries” जारी किया। रिपोर्ट के मुख्य बिंदु इस रिपोर्ट में चालू वित्त वर्ष 2022 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान 5% रखा गया ​​है। यह जनवरी 2021 में 11.5% के

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भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 582.271 अरब डॉलर पर पहुंचा

19 मार्च, 2021 को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 233 मिलियन डॉलर की वृद्धि  के साथ 582.271 अरब डॉलर पर पहुँच गया है। विश्व में सर्वाधिक विदेशी मुद्रा भंडार वाले देशों की सूची में भारत चौथे स्थान पर है, इस सूची में चीन पहले स्थान पर है। विदेशी मुद्रा भंडार इसे

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भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 590.18 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा

29 जनवरी, 2021 को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 4.85 बिलियन डॉलर की बढ़ोत्तरी के साथ 590.18 अरब डॉलर तक पहुँच गया है। यह भारत के विदेशी मुद्रा भंडार का रिकॉर्ड स्तर है, इसके साथ ही भारत ने सबस ज्यादा विदेश मुद्रा भंडार वाले देशों की सूची में रूस की

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केंद्रीय बजट 2021-2022 का सारांश व विश्लेषण

2021-22 के केंद्रीय बजट को 1 फरवरी, 2020 को COVID-19 महामारी के बीच पेश किया गया था। 2020 के बजट के बाद से, भारतीय अर्थव्यवस्था 2.24 लाख करोड़ सांकेतिक जीडीपी से घटकर 1.94 लाख करोड़ रुपये रह गई है। अर्थव्यवस्था के आकार में यह कमी राजस्व में गिरावट और वर्ष 2020 में अधिक व्यय के कारण

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