भारतीय जनता पार्टी

25 दिसम्बर को ही सुशासन दिवस (Good Governance Day) क्यों मनाया जाता है?

भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म  25 दिसम्बर को हुआ था, उनके जन्म दिवस को सुशासन दिवस के रूप मनाया जाता है। इस दिवस को पहली बार 2014 में मनाया गया था। उन्हें भारतीय राजनीती के सर्वाधिक प्रभावशाली नेताओं में से एक माना जाता है।

अटल बिहारी वाजपेयी

अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसम्बर, 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में हुआ था। उन्होंने ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज (अब लक्ष्मी बाई कॉलेज) से स्नातक की पढाई की। इसके बाद DAV कॉलेज कानपूर से उन्होंने राजनीतिक विज्ञान में M.A. की डिग्री प्राप्त की। शुरू में आर्य समाज से जुड़े थे। 1939 में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जुड़े और प्रचारक बने। अटल बिहारी वाजपेयी ने युवावस्था में ही स्वतंत्रता आन्दोलन में भाग लेने शुरू किया, भारत छोडो आन्दोलन में अटल बिहारी वाजपेयी और उनके बड़े भाई प्रेम को 23 दिनों के लिए कारागार में डाला गया था।

1977 के आम चुनावों में जनता पार्टी की जीत के बाद अटल बिहारी वाजपेयी को मोरारजी देसाई के मंत्रीमंडल में विदेश मंत्री का पद दिया गया था। विदेश मंत्री के रूप में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंदी में भाषण दिया था, वे संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंदी में भाषण देने वाले पहले व्यक्ति थे। 1980 में अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवानी और भैरों सिंह शेखावत ने भारतीय जनता पार्टी के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अटल बिहारी वाजपेयी तीन बार भारत के प्रधानमंत्री बने। वे पहली बार 1996 में प्रधानमंत्री बने, हालांकि उनका कार्यकाल केवल 13 दिन का था। दूसरी बार वे 1998 से 1999 के बीच 11 महीने के लिए प्रधानमंत्री बने। 1999 से 2004 के बीच वे तीसरी बार प्रधानमंत्री बने, इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में अपना कार्यकाल पूरा किया। इसके अलावा वे मोरारजी देसाई की कैबिनेट में विदेश मंत्री भी रहे।

अटल बिहारी वाजपेयी लगभग 4 दशक तक भारतीय संसद के सदस्य थे, वे 10 बार लोकसभा के सदस्य तथा 2 बार राज्यसभा के सदस्य चुने गये। 2009 में उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से सक्रीय राजनीती से सन्यास लिया।

Month:

राजस्थान में भाजपा की विधायक किरण माहेश्वरी का निधन

भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता और राजस्थान के राजसमंद से विधायक किरण माहेश्वरी का हाल ही में गुड़गांव के एक अस्पताल में निधन हुआ। वह 59 वर्ष की थीं और वे कोरोनावायरस से संक्रमित पायी गयी थीं। वे राजसमंद से तीन बार की विधायक रह चुकी हैं। किरण माहेश्वरी का पिछले कुछ दिनों से मेदांता अस्पताल में इलाज चल रहा था। पिछले कुछ दिनों में उनकी तबियत काफी ख़राब हो गयी थी।

मुख्य बिंदु

वह 14वीं लोकसभा में सांसद के रूप में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। 14वीं लोकसभा में उन्होंने उदयपुर का प्रतिनिधित्व किया था। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, विधानसभा अध्यक्ष सी.पी. जोशी और अन्य नेताओं ने शोक व्यक्त किया है।

किरण माहेश्वरी

किरण माहेश्वरी का जन्म अक्टूबर, 1961 में हुआ था। वे भारतीय जनता पार्टी से जुड़ी हुई थीं। उन्होंने 2004 से 2009 के बीच लोकसभा में उदयपुर का प्रतिनिधित्व किया। परन्तु वे 15वीं लोकसभा के चुनाव हार गयीं थीं, उनके कांग्रेस पार्टी के सचिन पायलट के विरुद्ध यह चुनाव लड़ा था। इसके बाद 2013 और 2018 में उन्होंने विधानसभा के चुनाव में जीत हासिल की। कोरोनावायरस से संक्रमित होने के कारण उनका निधन 30 नवम्बर, 2020 को हुआ।

Month:

Advertisement