भारतीय रेलवे

भारतीय रेलवे ने चिनाब पुल के मेहराब को पूरा किया

14 मार्च, 2021 को इंजीनियरों ने चिनाब पुल के निचला मेहराब को पूरा कर लिया है। इस पुल को भारतीय रेलवे के इंजीनियरिंग चमत्कार कहा जा रहा है। चिनाब पुल का ऊपरी मेहराब का हिस्सा बनाया जा रहा है और इसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।

मुख्य बिंदु

यह पुल चिनाब नदी के ऊपर बनाया जा रहा है। इस नदी का 467 मीटर का केंद्रीय फैलाव है। यह नदी के तल से 359 मीटर की ऊंचाई पर बनाया जा रहा है। यह पुल दिल्ली के कुतुब मीनार से भी अधिक ऊंचा है, जिसकी ऊंचाई 72 मीटर है। और यह पेरिस के एफिल टॉवर से भी ऊँचा है जिसकी ऊंचाई 324 मीटर है।

नदी के ऊपर पुल के मेहराब को केबल कार का उपयोग करके निर्माण की नई विधि द्वारा बनाया जा रहा है। दो केबल कारें जो 20 एमटी और 37 एमटी की क्षमता वाली हैं, विशेष रूप से निर्मित उच्च टावरों से जुड़ी होती हैं जिन्हें पाइलन्स कहा जाता है।  इस पुल के निर्माण में 3,27,051 मीट्रिक टन संरचनात्मक स्टील का उपयोग किया जाएगा।

चिनाब पुल

यह एक भारतीय रेलवे का स्टील और कंक्रीट आर्च ब्रिज है जो जम्मू और कश्मीर के रियासी जिले में बुक्कल और कौरी के बीच बनाया जा रहा है। इस पुल का आधार नवंबर 2017 में पूरा हो गया था जिसके बाद मुख्य मेहराब का निर्माण शुरू हुआ। नदी के तल से ऊंचाई वाले डेक की ऊंचाई 359 मीटर है। इस पुल की कुल लंबाई 1,315 मीटर है।

Month:

राष्ट्रीय रेल योजना – मुख्य बिंदु

केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने 10 मार्च, 2021 को घोषणा की कि भारतीय रेलवे ने वर्ष 2030 तक भविष्य के लिए तैयार रेलवे प्रणाली स्थापित करने के लिए एक राष्ट्रीय रेल योजना (NRP) तैयार की है।

राष्ट्रीय रेल योजना (National Rail Plan-NRP)

केंद्रीय रेल मंत्री ने इस पर प्रकाश डाला कि राष्ट्रीय रेल योजना को परिचालन क्षमता और वाणिज्यिक नीति दोनों पहलों के आधार पर रणनीति तैयार करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। मालभाड़े में रेलवे की हिस्सेदारी को 45 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया गया है।

मुख्य बिंदु

रेल मंत्री ने निचले सदन को एक लिखित जवाब में कहा कि शहरी परिवहन शहरी विकास का एक अभिन्न अंग है और राज्य का विषय है। इसलिए, संबंधित राज्य शहरी परिवहन बुनियादी ढांचे या मेट्रो इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे मेट्रो रेल परियोजनाओं या मेट्रोलाइट या मेट्रोनेटो को शुरू करने और विकसित करने के लिए जिम्मेदार है। उन्होंने यह भी कहा कि, लॉजिस्टिक्स के लिए वैल्यू-फॉर-मनी समाधान प्रदान करके नए बिजनेस को आकर्षित करने के लिए कई बिजनेस डेवलपमेंट यूनिट्स (BDU) स्थापित की गयी हैं।

Business Development Units

नए ट्रैफिक को आकर्षित करने और ट्रैफिक की मौजूदा धारा में रेल की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए ऐसी इकाइयों को भारतीय रेलवे के सभी क्षेत्रों में बनाया गया है। BDU उद्योगों के साथ बातचीत करेंगे और उन उद्योगों को रेल द्वारा खेप ले जाने में सुविधा प्रदान करेंगे।

BDU का कार्य

BDU के मुख्य कार्यों में शामिल हैं:

  1. पारंपरिक थोक वस्तुओं के परिवहन में रेलवे की वर्तमान रेल हिस्सेदारी बढ़ाना।
  2. स्थानीय उद्योगों से नए गैर-थोक ट्रैफिक को आकर्षित करना।

Month:

भारतीय रेलवे की सबसे लंबी मालगाड़ी ‘वासुकी’ ने रिकॉर्ड बनाया

भारतीय रेलवे के दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) ज़ोन ने हाल ही में भारतीय रेलवे नेटवर्क पर सबसे लंबी मालगाड़ी का संचालन करके एक नया रिकॉर्ड बनाया है।

मुख्य बिंदु

भारतीय रेलवे के SECR रायपुर डिवीजन ने पहली बार 5 मालगाड़ियों को जोड़कर चलाया गया। पांच मालगाड़ियों को जोड़ने से मालगाड़ी की कुल लंबाई लगभग 3.5 किलोमीटर हो गई। इस ट्रेन का नाम ‘वासुकी’ रखा गया था।

भिलाई डी केबिन से कोरबा के बीच की दूरी 224 किमी है और वासुकी ने पांच रेक के साथ इस दूरी को कवर किया। ट्रेन को इस दूरी को तय करने में लगभग 7 घंटे का समय लगा।

वासुकी को एक लोको पायलट, एक गार्ड और एक सहायक लोको पायलट की मदद से संचालित किया गया था।

पिछला रिकॉर्ड

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) ज़ोन ने हाल ही में दो मालगाड़ियों का भी संचालन किया है। इन मालगाड़ियों ने अपनी लंबाई के कारण ध्यान आकर्षित किया। यह दो मालगाड़ियाँ ‘शेष नाग’ और ‘सुपर एनाकोंडा’ थीं। सुपर एनाकोंडा एक पूरी तरह से भरी हुई तीन रेक की संयुक्त मालगाड़ी थी। ‘शेष नाग’ 2.8 किमी लंबी मालगाड़ी थी।

Month:

दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के सर्वेक्षण के लिए LiDAR तकनीक का उपयोग किया जायेगा

10 जनवरी को दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए जमीनी सर्वेक्षण करने के लिए LiDAR तकनीक का उपयोग शुरू किया गया। LiDAR का अर्थ ‘Light Detection and Ranging’ है।

मुख्य बिंदु

भारतीय रेलवे हेलीकॉप्टर पर माउंटेड LiDAR तकनीक का उपयोग कर रहा है। पहली बार मुंबई अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में इसका उपयोग किया गया था, उसके बाद अब दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर में इस तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।

इस तकनीक में जीपीएस डाटा, लेजर डाटा, फ्लिघ पैरामीटर्स के संयोजन का उपयोग किया जाता है, इससे सटीक सर्वेक्षण किया जा सकता है।

दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर की लंबाई लगभग 800 किलोमीटर है और स्टेशनों के संरेखण का फैसला सर्वेक्षण के आधार पर और सरकार के परामर्श से किया जायेगा। यह कॉरिडोर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को आगरा, लखनऊ, मथुरा, प्रयागराज, रायबरेली, इटावा, भदोही, अयोध्या और वाराणसी जैसे प्रमुख शहरों से जोड़ेगा।

यह तकनीक बहुत कम समय में उच्च गुणवत्ता वाला डाटा प्रदान करती है। यह डाटा आमतौर पर भूस्खलन, सड़कों, सतही परिवहन, नहर, सिंचाई और शहर नियोजन से संबंधित परियोजनाओं में उपयोग की जाती है।

LIDAR

  • यह एक रिमोट सेंसिंग विधि है जो पृथ्वी पर दूरी को मापने के लिए स्पंदित लेजर के रूप में प्रकाश का उपयोग करती है। यह प्रणाली लाइट पल्सेस पृथ्वी के आकार और इसकी सतह विशेषताओं के बारे में 3D जानकारी उत्पन्न करती हैं। एक LiDAR उपकरण में एक स्कैनर, लेजर और एक जीपीएस रिसीवर होता है। हेलीकॉप्टर और हवाई जहाज LiDAR डेटा प्राप्त करने के लिए सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले प्लेटफ़ॉर्म हैं।
  • LiDAR दो प्रकार के होते हैं – स्थलाकृतिक (topographic) और बाथमीट्रिक (Bathymetric)।Topographic LiDAR भूमि का नक्शा बनाने के लिए इन्फ्रारेड लेजर का उपयोग करता है। दूसरी ओर, बाथमीट्रिक LiDAR नदी के तल की ऊँचाई और समुद्र तल को मापता है।
  • इस तकनीक में उपयोग किए जाने वाले प्रकीर्णन प्रभाव रमन प्रकीर्णन, रेले स्कैटरिंग, माई स्कैटरिंग हैं।

Month:

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने अपग्रेडेड ई-टिकटिंग वेबसाइट और मोबाइल एप्प लांच की

केन्द्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने ऑनलाइन रेलवे टिकटों की बुकिंग के लिए अपग्रेडेड ई-टिकटिंग वेबसाइट और मोबाइल एप्प लांच की। अब नए सिस्टम के साथ भोजन, रिटायरिंग रूम और होटल की बुकिंग सुविधा को एकीकृत किया गया है। इसमें यूजर्स रिफंड स्टेटस का पता भी कर सकते हैं। पहले यह सुविधा आसानी से उपलब्ध नहीं थी।

मुख्य बिंदु

इस नए सिस्टम के द्वारा ट्रेन खोज और चयन को सरल बनाया गया है, इससे यात्रियों को काफी सुविधा होगी। इस नए सिस्टम में, वेटिंग लिस्ट  की कन्फर्मेशन की संभावना भी दिखाई जाएगी।

इस अवसर पर रेल मंत्री पियूष गोयल ने कहा कि रेलवे देश की सेवा के लिए प्रतिबद्ध है और रेल यात्रा के अनुभव को और बेहतर बनाने के लिए अपनी सेवाओं को बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रहा है। उन्होंने कहा, ऑनलाइन रेलवे टिकटों की बुकिंग के लिए यह अपग्रेडेड ई-टिकटिंग प्लेटफॉर्म, यात्री सुविधा को बढ़ाएगा।

भारतीय रेलवे

भारतीय रेलवे विश्व के सबसे उत्कृष्ट रेलवे नेटवर्क में से एक है, भारतीय रेलवे का 1,51,000 किलोमीटर ट्रैक, 7000 स्टेशन, 13 लाख कर्मचारी तथा 160 वर्षों का इतिहास है। भारत में रेलवे की शुरुआत 16 अप्रैल, 1853 को बोरी बंदर और थाने के बीच हुई थी। तत्पश्चात भारतीय रेलवे का काफी विस्तार हुआ, देश के आर्थिक विकास में भारतीय रेलवे की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है।

 

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LiDAR तकनीक क्या है?

भारतीय रेलवे दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए जमीनी सर्वेक्षण करने के लिए LiDAR तकनीक का उपयोग करेगा। LiDAR का अर्थ Light Detection and Ranging है।

मुख्य बिंदु

भारतीय रेलवे को हेलीकॉप्टर पर माउंटेड LiDAR तकनीक का उपयोग करेगा।  पहली बार मुंबई अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में इसका उपयोग किया गया था, उसके बाद अब दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर में इस तकनीक का उपयोग किया जायेगा।

इस तकनीक में जीपीएस डाटा, लेजर डाटा, फ्लिघ पैरामीटर्स के संयोजन का उपयोग किया जाता है, इससे सटीक सर्वेक्षण किया जा सकता है।

दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर की लंबाई लगभग 800 किलोमीटर है और स्टेशनों के संरेखण का फैसला सर्वेक्षण के आधार पर और सरकार के परामर्श से किया जायेगा। यह कॉरिडोर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को आगरा, लखनऊ, मथुरा, प्रयागराज, रायबरेली, इटावा, भदोही, अयोध्या और वाराणसी जैसे प्रमुख शहरों से जोड़ेगा।

यह तकनीक बहुत कम समय में उच्च गुणवत्ता वाला डाटा प्रदान करती है। यह डाटा आमतौर पर भूस्खलन, सड़कों, सतही परिवहन, नहर, सिंचाई और शहर नियोजन से संबंधित परियोजनाओं में उपयोग की जाती है।

LIDAR

  • यह एक रिमोट सेंसिंग विधि है जो पृथ्वी पर दूरी को मापने के लिए स्पंदित लेजर के रूप में प्रकाश का उपयोग करती है। यह प्रणाली लाइट पल्सेस पृथ्वी के आकार और इसकी सतह विशेषताओं के बारे में 3D जानकारी उत्पन्न करती हैं। एक LiDAR उपकरण में एक स्कैनर, लेजर और एक जीपीएस रिसीवर होता है। हेलीकॉप्टर और हवाई जहाज LiDAR डेटा प्राप्त करने के लिए सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले प्लेटफ़ॉर्म हैं।
  • LiDAR दो प्रकार के होते हैं – स्थलाकृतिक (topographic) और बाथमीट्रिक (Bathymetric)।Topographic LiDAR भूमि का नक्शा बनाने के लिए इन्फ्रारेड लेजर का उपयोग करता है। दूसरी ओर, बाथमीट्रिक LiDAR नदी के तल की ऊँचाई और समुद्र तल को मापता है।
  • इस तकनीक में उपयोग किए जाने वाले प्रकीर्णन प्रभाव रमन प्रकीर्णन, रेले स्कैटरिंग, माई स्कैटरिंग हैं।

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