यूनाइटेड किंगडम

बोरिस जॉनसन ने अपनी भारत यात्रा रद्द की

यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री जॉनसन ने अपनी भारत यात्रा रद्द कर दी है। दरअसल, यूनाइटेड किंगडम में महामारी से निपटने के लिए उन्होंने अपनी भारत यात्रा को रद्द करने का निर्णय लिया है। इस संबध में उन्होंने पीएम मोदी से बातचीत की। इससे पहले बोरिस जॉनसन 2021 में भारत के गणतंत्र दिवस  में मुख्य अतिथि के तौर पर आने वाले थे।

मुख्य बिंदु

गौरतलब है कि बोरिस जॉनसन भारत की स्वतंत्रता के बाद भारत के गणतंत्र दिवस में शामिल होने वाले दूसरे ब्रिटिश नेता हैं। इससे पहले जॉन मेजर 1993 में भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल हुए थे।

हालिया दिनों में भारत-यूके सम्बन्ध

ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने G7 देशों की बैठक के लिए 3 अन्य देशों को आमंत्रित किया है, इसमें भारत, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया शामिल हैं। इससे पहले यूके ने D-10 समूह का प्रस्ताव रखा था, इसमें G7 देशों के अलावा भारत, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया को भी शामिल किया जायेगा। परन्तु यह प्रस्ताव अभी अपनी शुरूआती अवस्था में है, इसमें फिलहाल कोई विशेष प्रगति नही हुई है।

बोरिस जॉनसन

बोरिस जॉनसन का जन्म 9 जून, 1964 को हुआ था, वे 2008 से 2016 तक लन्दन के मेयर रहे। वे 2016 से 2018 तक विदेश सचिव भी रहे हैं। वे वर्तमान में यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री हैं।

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यूनाइटेड किंगडम ने ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन को मंज़ूरी दी

हाल ही में यूनाइटेड किंगडम ने ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राज़ेनेका वैक्सीन को उपयोग के लिए मंजूरी दे दी है। इस वैक्सीन का निर्माण भारतीय कंपनी सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया ने किया है। बढ़ते कोरोनोवायरस मामले के बीच इस वैक्सीन की डोज़ लोगों को दी जाएगी। फिलहाल, सरकार ने वैक्सीन की 100 मिलियन डोज़ के लिए आर्डर दिया है, इससे लगभग 50 मिलियन लोगों का टीकाकरण करवाया जा सकता है।

मुख्य बिंदु

इस मौके पर यूनाइटेड किंगडम के स्वास्थ्य सचिव मैट हैंकॉक ने कहा, यह पूरी आबादी को कवर करेगा। हाल ही में यूनाइटेड किंगडम में कोरोनोवायरस का एक और अधिक संक्रामक स्ट्रेन पाया गया है। जिसके कारण कई देशों ने यूके से उड़ानें निलंबित कर दी हैं। भारत ने भी यूनाइटेड किंगडम से आने वाली उड़ानों पर रोक लगा दी है।

भारत में कोरोना वैक्सीन

भारत में अभी Covid-19 वैक्सीन का टीकाकरण शुरू नही किया है। हाल ही में भारत बायोटेक ने केंद्रीय दवा नियामक, DCGI को आपातकालीन उपयोग प्राधिकरण के लिए आवेदन दिया है। भारत बायोटेक द्वारा कोवाक्सिन नामक टीके का विकास किया गया है। इसके अलावा सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और फाइजर ने भी भारत में COVID-19 वैक्सीन के आपातकालीन उपयोग की मंजूरी मांगी है। शीघ्र ही भारत सरकार भी टीकाकरण की प्रक्रिया शुरू करने जा रही है।

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यूके-वियतनाम मुक्त व्यापार समझौता : मुख्य बिंदु

यूनाइटेड किंगडम और वियतनाम ने हाल ही में एक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौता के तहत सात साल के भीतर 99% टैरिफ को खत्म किया जायेगा। 99% टैरिफ के उन्मूलन के साथ, वियतनाम को 114 मिलियन पाउंड की टैरिफ बचत होगी।

पृष्ठभूमि

ब्रिटेन के आधिकारिक तौर पर यूरोपीय संघ को छोड़ने के बाद, यह कई द्विपक्षीय अर्थव्यवस्था से संबंधित सौदों को सुरक्षित करने के लिए काम कर रहा है। ब्रिटेन के साथ पहला पोस्ट-ब्रेक्सिट सौदा व्यापार समझौता जापान ने किया था उसके बाद ब्रिटेन ने सिंगापुर के साथ भी समझौता किया था, तत्पश्चात यह ब्रिटेन का यह तीसरा समझौता है।

यूनाइटेड किंगडम यूरोप में वियतनाम का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। 2019 में, वियतनाम ने यूके को 4.6 बिलियन पाउंड के मूल्य का सामान निर्यात किया था और यूके ने 600 मिलियन पाउंड का सामान निर्यात किया था।

ट्रांस पैसिफिक पार्टनरशिप

वियतनाम और सिंगापुर के साथ यूके का सौदा ट्रांस पैसिफिक पार्टनरशिप के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा। ट्रांस पैसिफिक पार्टनरशिप ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रुनेई, जापान, चीन, मलेशिया, पेरू, सिंगापुर, न्यूजीलैंड, वियतनाम, अमेरिका, चिली और पेरू के बीच एक प्रस्तावित व्यापार समझौता है। 2016 में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। लेकिन राष्ट्रपति ट्रम्प ने 2017 में ट्रांस पैसिफिक पार्टनरशिप पर आपत्ति ज़ाहिर की थी। बाकी देशों ने 2018 में ट्रांस पैसिफिक पार्टनरशिप के लिए एक नए व्यापक और प्रगतिशील समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

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भारत पर ब्रेक्सिट सौदे का क्या प्रभाव पड़ेगा?

हाल ही में यूरोपीय संघ और यूनाइटेड किंगडम के बीच ब्रेक्सिट सौदे  पर हस्ताक्षर किये गये, यह सौदा भारत की दृष्टि से बेहद लाभदायक है।

भारत पर प्रभाव

  • यूरोपीय संघ-यूके ब्रेक्सिट सौदे से भारत के लिए लाभ मुख्य रूप से सेवा क्षेत्र में होगा।ऐसा इसलिए है, क्योंकि ब्रिटेन की मुद्रा सस्ती हो रही हैं। इसलिए, यह भारतीय फर्मों के लिए कम खर्चीला होगा, और फर्मों को कई अन्य प्रकार की छूट भी मिल सकती है।
  • इसके अलावा, ब्रेक्सिट भारत के लिए यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के साथ व्यापार सौदों पर हस्ताक्षर करने के नए अवसर खोल सकता है।भारत यूरोपीय संघ के साथ द्विपक्षीय व्यापार और निवेश समझौते पर हस्ताक्षर करने की कोशिश कर रहा है। 2013 में इसे बंद कर दिया गया जब दोनों पक्ष अपने मतभेदों को समेटने में विफल रहे।
  • ब्रिटेन के साथ एक व्यापार सौदे की संभावना अब काफी अधिक बढ़ गयी है। हाल ही में भारत ने गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि के रूप में यूके के पीएम बोरिस जॉनसन को आमंत्रित किया है। बोरिस जॉनसन ने भी भारत आने के लिए हामी भरी है। बोरिस जॉनसन की भारत यात्रा के दौरान दोंनो देशों के बीच व्यापारिक सम्बन्धों में तेज़ी आने के आसार हैं।
  • जिन भारतीय कंपनियों का मुख्यालय ब्रिटेन या यूरोपीय संघ में स्थित है, उन्हें कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि यूके और यूरोपीय संघ द्वारा अपने क्षेत्रों में पेशेवरों की आवाजाही पर कुछ एक प्रतिबंधों लगाए गये हैं।
  • ब्रेक्सिट के बाद ब्रिटेन को और अधिक प्रतिभाओं की जरूरत होगी।ऐसा इसलिए है क्योंकि यूरोपीय संघ के बाहर पेशेवरों की यात्रा में प्रतिबंध हैं। यूरोपीय संघ के पेशेवरों को अब ब्रिटेन की यात्रा के लिए नए वीजा और अन्य प्रक्रियाओं का पालन करना होगा। हालांकि, यह भारतीय पेशेवरों के लिए एक प्रवेश द्वार होगा। इसके अलावा, भारत की अंग्रेजी बोलने वाली प्रतिभाशाली आबादी  इस मौके को हाथोंहाथ लेने में सक्षम है।

पृष्ठभूमि

ब्रेक्सिट सौदे के साथ, भारत ब्रिटेन के साथ अपने द्विपक्षीय व्यापार सौदे को 26% तक बढ़ाने में सक्षम होगा। ब्रिटेन 14 बिलियन डालर से अधिक के द्विपक्षीय व्यापार के साथ भारत का 14वां सबसे बड़ा व्यापार भागीदार है। भारत वर्तमान में यूके के साथ 2 बिलियन अमरीकी डालर का व्यापार अधिशेष प्राप्त करता है।

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ब्रेक्सिट सौदा (Brexit Deal) क्या है?

यूनाइटेड किंगडम और यूरोपीय संघ एक समझौते करने का प्रयास कर रहे हैं और अपने भविष्य के संबंधों की शर्तों को परिभाषित करने की कोशिश कर रहे हैं। गौरतलब है कि इसकी समय सीमा 31 दिसंबर, 2020 तक है।

ब्रेक्सिट सौदा क्या है?

यूनाइटेड किंगडम औपचारिक रूप से 31 जनवरी, 2020 को यूरोपीय संघ से बाहर हुआ था। देश ने इसके बाद 11 महीने के परिवर्तन काल (transition period) ​​में प्रवेश किया, जिसके दौरान यह यूरोपीय संघ के नियमों का पालन करता रहा। इस परिवर्तन काल ​​के दौरान, यूनाइटेड किंगडम ने यूरोपीय संघ के साथ एक समझौते पर बातचीत करने की कोशिश की। परिवर्तन अवधि समाप्त होने के बाद यह सौदा यूके और यूरोपीय संघ के बीच संबंधों के प्रमुख पहलुओं को निर्धारित करेगा। इसमें रक्षा, व्यापार समझौता, आव्रजन, सुरक्षा इत्यादि शामिल हैं। यह सौदा यूके और यूरोपीय संघ के संबंधों को निर्धारित करेगा, इसे ब्रेक्सिट सौदा कहा जाता है। इस सौदे को अंतिम रूप दिया जाना अभी बाकी है।

प्रमुख चिंताएँ

  • यूरोप का उच्चतम न्यायालय यूरोपीय कानून का अंतिम मध्यस्थ बना रहेगा।हालाँकि, यूके सरकार ने घोषणा की है कि ECJ (यूरोपियन कोर्ट ऑफ़ जस्टिस) का सीधा अधिकार क्षेत्र समाप्त हो जाएगा।
  • यूरोपीय संघ के देशों में ब्रिटेन के नागरिकों के यात्रा नियम और ब्रिटेन में यूरोपीय नागरिकों के लिए यात्रा नियमों पर अभी निर्णय लिया जाना बाकी है।गौरतलब है कि अब यूरोपीय स्वास्थ्य बीमा कार्ड अधिकांश ब्रिटिश नागरिकों के लिए मान्य नहीं होगा।
  • यूनाइटेड किंगडम और यूरोपीय संघ में वित्तीय सेवाओं और नियमों के लिए अब अलग-अलग व्यापार समझौते हैं। दोनों भागीदारों को अभी तक एक दूसरे के नियमों को मान्यता देना बाकी है।इससे वित्तीय कंपनियों को अपनी सेवाओं का निर्यात करना मुश्किल हो रहा है।
  • यूरोपीय संघ और ब्रिटेन को डेटा सुरक्षा नियमों पर निष्कर्ष निकालना अभी बाकी है।
  • इससे पहले, यूरोपीय संघ के सभी देशों द्वारा यूके के पेशेवरों को मान्यता दी गई थी।अब, ब्रेक्सिट के बाद, उनकी व्यावसायिक योग्यता की मान्यता में प्रतिबंध लग सकता है।
  • ब्रिटेन को यूरोपीय संघ के कई डेटाबेस तक पहुंच अब नहीं मिलेगी, जिसका उपयोग पुलिस हर रोज करती है।

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यूके में तेज़ी से फैलने वाला कोरोनावायरस का नया स्ट्रेन पाया गया

वर्तमान में विश्व भर में कोरोनावायरस के विरुद्ध टीकाकरण की मुहीम काफी तेज़ हो गयी है। परन्तु, हाल ही में यूके में कोरोनावायरस का एक नया स्ट्रेन खोजा गया है, इसे B.1.1.7 नाम दिया गया है। बताया जा रहा है कि यह नया कोरोनावायरस स्ट्रेन 70% तेज़ी से फैलता है। गौरतलब है कि जब से कोरोनावायरस की खोज हुई है, तब इसे इसमें कई बदलाव भी आ चुके हैं।

B.1.1.7 क्या है?

कोरोनावायरस के इस नए स्ट्रेन के यूनाइटेड किंगडम में तेज़ी से संक्रमण फ़ैल रहा है। इसके कारण कई देशों ने यूनाइटेड किंगडम से आने वाली फ्लाइट्स पर रोक लगा दी है। भारत ने भी एहतियात के तौर पर यूनाइटेड किंगडम से आने वाली फ्लाइट्स पर 31 दिसम्बर, 2020 तक रोक लगा दी है।

ब्रिटिश सोसायटी फॉर इम्यूनोलॉजी के पूर्व अध्यक्ष पीटर ओपेंशॉ के अनुसार यह वैरिएंट लगभग 40-70% अधिक संक्रमणीय है।

टीकाकरण पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?

विश्व भर में कई कंपनियों ने कोरोनावायरस के लिए टीके बना लिए हैं। कई कंपनियों के टीके परीक्षण के अंतिम चरणों में हैं और कई देशों में तो टीकाकरण शुरू भी हो चुका है। वैज्ञानिकों का मानना है कि B.1.1.7 कोरोनावायरस स्ट्रेन के कारण टीकाकरण और उपचार प्रक्रिया पर कोई विशेष प्रभाव नहीं दिख रहा है।

यूनाइटेड किंगडम की सलाहकार संस्था New and Emerging Respiratory Virus Threats Advisory Group (NERVTAG) ने इस सम्बन्ध में एक पत्र जारी किया है। हालाँकि अभी तक विशेष प्रभाव दिखाई नही पड़ा है, परन्तु अभी भी एहतियात बरता जाना चाहिए।

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