यूरोपीय संघ

भारत पर ब्रेक्सिट सौदे का क्या प्रभाव पड़ेगा?

हाल ही में यूरोपीय संघ और यूनाइटेड किंगडम के बीच ब्रेक्सिट सौदे  पर हस्ताक्षर किये गये, यह सौदा भारत की दृष्टि से बेहद लाभदायक है।

भारत पर प्रभाव

  • यूरोपीय संघ-यूके ब्रेक्सिट सौदे से भारत के लिए लाभ मुख्य रूप से सेवा क्षेत्र में होगा।ऐसा इसलिए है, क्योंकि ब्रिटेन की मुद्रा सस्ती हो रही हैं। इसलिए, यह भारतीय फर्मों के लिए कम खर्चीला होगा, और फर्मों को कई अन्य प्रकार की छूट भी मिल सकती है।
  • इसके अलावा, ब्रेक्सिट भारत के लिए यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के साथ व्यापार सौदों पर हस्ताक्षर करने के नए अवसर खोल सकता है।भारत यूरोपीय संघ के साथ द्विपक्षीय व्यापार और निवेश समझौते पर हस्ताक्षर करने की कोशिश कर रहा है। 2013 में इसे बंद कर दिया गया जब दोनों पक्ष अपने मतभेदों को समेटने में विफल रहे।
  • ब्रिटेन के साथ एक व्यापार सौदे की संभावना अब काफी अधिक बढ़ गयी है। हाल ही में भारत ने गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि के रूप में यूके के पीएम बोरिस जॉनसन को आमंत्रित किया है। बोरिस जॉनसन ने भी भारत आने के लिए हामी भरी है। बोरिस जॉनसन की भारत यात्रा के दौरान दोंनो देशों के बीच व्यापारिक सम्बन्धों में तेज़ी आने के आसार हैं।
  • जिन भारतीय कंपनियों का मुख्यालय ब्रिटेन या यूरोपीय संघ में स्थित है, उन्हें कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि यूके और यूरोपीय संघ द्वारा अपने क्षेत्रों में पेशेवरों की आवाजाही पर कुछ एक प्रतिबंधों लगाए गये हैं।
  • ब्रेक्सिट के बाद ब्रिटेन को और अधिक प्रतिभाओं की जरूरत होगी।ऐसा इसलिए है क्योंकि यूरोपीय संघ के बाहर पेशेवरों की यात्रा में प्रतिबंध हैं। यूरोपीय संघ के पेशेवरों को अब ब्रिटेन की यात्रा के लिए नए वीजा और अन्य प्रक्रियाओं का पालन करना होगा। हालांकि, यह भारतीय पेशेवरों के लिए एक प्रवेश द्वार होगा। इसके अलावा, भारत की अंग्रेजी बोलने वाली प्रतिभाशाली आबादी  इस मौके को हाथोंहाथ लेने में सक्षम है।

पृष्ठभूमि

ब्रेक्सिट सौदे के साथ, भारत ब्रिटेन के साथ अपने द्विपक्षीय व्यापार सौदे को 26% तक बढ़ाने में सक्षम होगा। ब्रिटेन 14 बिलियन डालर से अधिक के द्विपक्षीय व्यापार के साथ भारत का 14वां सबसे बड़ा व्यापार भागीदार है। भारत वर्तमान में यूके के साथ 2 बिलियन अमरीकी डालर का व्यापार अधिशेष प्राप्त करता है।

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ब्रेक्सिट सौदा (Brexit Deal) क्या है?

यूनाइटेड किंगडम और यूरोपीय संघ एक समझौते करने का प्रयास कर रहे हैं और अपने भविष्य के संबंधों की शर्तों को परिभाषित करने की कोशिश कर रहे हैं। गौरतलब है कि इसकी समय सीमा 31 दिसंबर, 2020 तक है।

ब्रेक्सिट सौदा क्या है?

यूनाइटेड किंगडम औपचारिक रूप से 31 जनवरी, 2020 को यूरोपीय संघ से बाहर हुआ था। देश ने इसके बाद 11 महीने के परिवर्तन काल (transition period) ​​में प्रवेश किया, जिसके दौरान यह यूरोपीय संघ के नियमों का पालन करता रहा। इस परिवर्तन काल ​​के दौरान, यूनाइटेड किंगडम ने यूरोपीय संघ के साथ एक समझौते पर बातचीत करने की कोशिश की। परिवर्तन अवधि समाप्त होने के बाद यह सौदा यूके और यूरोपीय संघ के बीच संबंधों के प्रमुख पहलुओं को निर्धारित करेगा। इसमें रक्षा, व्यापार समझौता, आव्रजन, सुरक्षा इत्यादि शामिल हैं। यह सौदा यूके और यूरोपीय संघ के संबंधों को निर्धारित करेगा, इसे ब्रेक्सिट सौदा कहा जाता है। इस सौदे को अंतिम रूप दिया जाना अभी बाकी है।

प्रमुख चिंताएँ

  • यूरोप का उच्चतम न्यायालय यूरोपीय कानून का अंतिम मध्यस्थ बना रहेगा।हालाँकि, यूके सरकार ने घोषणा की है कि ECJ (यूरोपियन कोर्ट ऑफ़ जस्टिस) का सीधा अधिकार क्षेत्र समाप्त हो जाएगा।
  • यूरोपीय संघ के देशों में ब्रिटेन के नागरिकों के यात्रा नियम और ब्रिटेन में यूरोपीय नागरिकों के लिए यात्रा नियमों पर अभी निर्णय लिया जाना बाकी है।गौरतलब है कि अब यूरोपीय स्वास्थ्य बीमा कार्ड अधिकांश ब्रिटिश नागरिकों के लिए मान्य नहीं होगा।
  • यूनाइटेड किंगडम और यूरोपीय संघ में वित्तीय सेवाओं और नियमों के लिए अब अलग-अलग व्यापार समझौते हैं। दोनों भागीदारों को अभी तक एक दूसरे के नियमों को मान्यता देना बाकी है।इससे वित्तीय कंपनियों को अपनी सेवाओं का निर्यात करना मुश्किल हो रहा है।
  • यूरोपीय संघ और ब्रिटेन को डेटा सुरक्षा नियमों पर निष्कर्ष निकालना अभी बाकी है।
  • इससे पहले, यूरोपीय संघ के सभी देशों द्वारा यूके के पेशेवरों को मान्यता दी गई थी।अब, ब्रेक्सिट के बाद, उनकी व्यावसायिक योग्यता की मान्यता में प्रतिबंध लग सकता है।
  • ब्रिटेन को यूरोपीय संघ के कई डेटाबेस तक पहुंच अब नहीं मिलेगी, जिसका उपयोग पुलिस हर रोज करती है।

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यूरोपीय संघ ने गरीब देशों को प्लास्टिक अपशिष्ट निर्यात करने पर प्रतिबन्ध लगाया

हाल ही में यूरोपीय संघ ने घोषणा की है कि उसने गरीब देशों को प्लास्टिक के निर्यात पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। यह नए नियम यूरोपीय संघ के 2006 अपशिष्ट शिपमेंट विनियमन में संशोधन करेंगे, इसके द्वारा OECD के बाहर कम विकसित देशों को निर्यात पर रोक लगाई जाएगी।

मुख्य बिंदु

चीन ने 2018 में प्लास्टिक आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था, उसके बाद यूरोपीय संघ ने यह फैसला लिया है। नए नियमों के अनुसार, गैर-ओईसीडी देशों को केवल साफ और गैर-खतरनाक अपशिष्ट निर्यात को रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जा सकता है। यह एक परिपत्र अर्थव्यवस्था (circular economy) की स्थापना करने के लिए यूरोपीय संघ का एक महत्वपूर्ण प्रयास का एक हिस्सा है।

ओईसीडी के 37 देशों के भीतर खतरनाक प्लास्टिक के निर्यात को भेजने वाले देश और प्राप्त करने वाले देश को अनुमति लेनी होगी। यह नए नियम 1 जनवरी, 2021 से लागू हो जायेंगे। ये नियम यूरोपीय संघ के भीतर प्लास्टिक शिपमेंट को नियंत्रित करेंगे।

पिछले साल यूरोपीय संघ ने 1.5 मिलियन टन प्लास्टिक कचरे का निर्यात किया है, जो ज्यादातर इंडोनेशिया, मलेशिया और तुर्की को भेजा गया था।

1989 बेसल कन्वेंशन

Control of Transboundary Movements of Hazardous Wastes and Their Disposal अथवा बेसेल कन्वेंशन पर 1989 में हस्ताक्षर किये गये थे। इस संधि का उद्देश्य देशों के बीच खतरनाक कचरे के हस्तांतरण को कम करना है। यूरोपीय संघ और 186 देश इस कन्वेंशन में शामिल हैं।

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यूरोपीय संघ ने फाइजर-बायोएनटेक के कोरोना वैक्सीन को मंजूरी दी

हाल ही में यूरोपीय संघ ने फाइजर और बायोएनटेक द्वारा विकसित कोरोनोवायरस वैक्सीन को मंजूरी दे दी है। गौरतलब है कि इस सप्ताह के अंत में शुरू होने वाले यूरोपीय संघ के सामूहिक टीकाकरण कार्यक्रम का पहला चरण शुरू होगा। वैक्सीन द्वारा सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों को पूरा करने के बाद यूरोपीय संघ के कार्यकारी आयोग ने इसे मंज़ूरी दे दी है। यूरोपीय संघ में टीकाकरण 27 दिसम्बर को शुरू होगा और इसके लिए डोज़ की आपूर्ति बेल्जियम में फाइजर के विनिर्माण प्लांट से की जायेगी।

फाइजर वैक्सीन

फाइजर ने 43,538 प्रतिभागियों के बीच 94 से अधिक COVID-19 संक्रमणों का मूल्यांकन किया। फाइजर वैक्सीन mRNA तकनीक का उपयोग करता है। यह COVID-19 वैक्सीन के लिए यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा निर्धारित 50% प्रभावशीलता से अधिक हासिल करने में सफल रहा हिया।

ऑक्सफोर्ड वैक्सीन फाइजर वैक्सीन से बेहतर क्यों है?

ऑक्सफोर्ड वैक्सीन ने फाइजर वैक्सीन की तुलना में बेहतर प्रभावकारिता दिखाई है। ऑक्सफोर्ड वैक्सीन के विपरीत मॉडर्ना और फाइजर बायोएनटेक वैक्सीन का परिवहन -20 से -80 डिग्री सेल्सियस तापमान पर किया जाना चाहिए। जबकि ऑक्सफोर्ड के टीके सामान्य दो से आठ डिग्री सेल्सियस पर रेफ्रिजरेट किए जा सकते हैं।

फाइजर को अनिवार्य रूप से डिज़ाइन किए गए “थर्मल शिपर” में अपने टीके को अनिवार्य रूप से वितरित करना पड़ता है जो -80 डिग्री सेल्सियस को बनाए रखने के लिए शुष्क बर्फ का उपयोग करता है।

इसके अलावा, हाल ही में यह साबित हुआ कि ऑक्सफोर्ड वैक्सीन की आधी खुराक से उच्च सुरक्षा मिलने की संभावना है। इससे आम जनता के लिए अधिक खुराक उपलब्ध हो सकेगी।

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