रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन

DRDO ने DIPCOVAN नामक कोविड-19 एंटीबाडी डिटेक्शन किट विकसित की

रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन (DRDO) ने हाल ही में DIPCOVAN नामक कोविड-19 एंटीबाडी डिटेक्शन किट विकसित की है। इस किट के द्वारा कोविड-19 का पता समय पर लगाया जा सकता है।

मुख्य बिंदु

इस किट को DRDO के एक प्रयोगशाला Defence Institute of Physiology and Allied Sciences द्वारा दिल्ली बेस्ड फर्म Vanguard Diagnostics Pvt Ltd के साथ मिलकर बनाया गया है। इस एंटीबाडी किट को भारतीय मेडिकल अनुसन्धान परिषद् (ICMR) द्वारा मंज़ूरी दी जा चुकी है। इस किट को भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा स्वदेशी रूप से बनाया गया है।

मई, 2021 में इस किट को Drugs Controller General of India और Central Drugs Standard Control Organisation से भी मंज़ूरी मिल चुकी है। इस किट को Vanguard Diagnostics Pvt Ltd द्वारा जून, 2021 के पहले हफ्ते में लांच किया जायेगा। यह एंटीबाडी डिटेक्शन किट 75 रुपये प्रति टेस्ट की दर पर उपलब्ध होगी।

DRDO की एंटी-कोविड दवा

2-डीजी को रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (Defence Research Development Organisation) द्वारा आपातकालीन उपयोग के लिए विकसित किया गया है। 2-DG  का अर्थ 2-Deoxy – D – Glucose है। इसे डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज (Dr. Reddy’s Laboratories) के सहयोग से विकसित किया गया है।

यह दवा अस्पताल में भर्ती मरीजों की तेजी से रिकवरी सुनिश्चित करती है और नैदानिक ​​परीक्षणों के दौरान पूरक ऑक्सीजन निर्भरता (supplemental oxygen dependence) को कम करेगी। यह संक्रमित कोशिकाओं में जमा हो जाती है और वायरल संश्लेषण को रोकती है। दवा पाउच रूप में आती है। पानी में घोलकर इसका सेवन मौखिक रूप से किया जाता है। इसे इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड साइंसेज (INMAS) द्वारा विकसित किया गया था। INMAS DRDO के तहत संचालित होने वाली एक प्रयोगशाला है। कोविड-19 के गंभीर रोगियों के लिए DGCI ने इस दवा के आपातकालीन उपयोग की अनुमति दी है। 2-डीजी एक जेनेरिक मॉलिक्यूल है और इस प्रकार आसानी से देश में प्रचुर मात्रा में निर्मित व उपलब्ध कराया जा सकता है।

Month:

DRDO ने सिंगल क्रिस्टल ब्लेड टेक्नोलॉजी विकसित की

रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन (Defence Research and Development Organisation) ने हाल ही में सिंगल क्रिस्टल ब्लेड प्रौद्योगिकी (Single Crystal Blade Technology) विकसित की है। DRDO ने इस तरह के 60 ब्लेड हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को दिए हैं। दुनिया के बहुत कम देशों के पास यह तकनीक है। वे देश यूके, अमेरिका, रूस और फ्रांस हैं।

सिंगल क्रिस्टल ब्लेड क्या है?

  • हेलीकॉप्टरों को चरम स्थितियों में संचालित करने के लिए शक्तिशाली और कॉम्पैक्ट एयरो इंजन की आवश्यकता होती है। इसके लिए, सिंगल क्रिस्टल ब्लेड आवश्यक हैं।
  • सिंगल क्रिस्टल ब्लेड निकल आधारित सुपर एलाय से बने होते हैं।यह एलाय उच्च तापमान में भी कार्य करने में सक्षम हैं।
  • हेलीकॉप्टर में तकनीक का इस्तेमाल किया जायेगा।

रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन (DRDO)

रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन (DRDO) की स्थापना 1958 में की गयी थी, इसका मुख्यालय नई दिल्ली के DRDO भवन में स्थित है। यह भारत सरकार की एजेंसी है। यह सैन्य अनुसन्धान तथा विकास से सम्बंधित कार्य करता है। DRDO का आदर्श वाक्य “बलस्य मूलं विज्ञानं” है। DRDO में 30,000 से अधिक कर्मचारी कार्य करते हैं। वर्तमान में DRDO के चेयरमैन डॉ. जी. सतीश रेड्डी हैं। DRDO का नियंत्रण केन्द्रीय रक्षा मंत्रालय के पास है। DRDO की 52 प्रयोगशालाओं का नेटवर्क है।

Month:

DRDO ने बनाई भारत की पहली स्वदेशी मशीन पिस्टल ‘ASMI’

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने भारतीय सेना के साथ मिलकर भारत की पहली स्वदेशी मशीन पिस्टल ‘ASMI’ विकसित की है। इस पिस्टल को हाल ही में भारतीय सेना के नवाचार प्रदर्शन कार्यक्रम में प्रदर्शित किया गया था।

मुख्य बिंदु

स्वदेशी रूप से विकसित यह मशीन पिस्टल रक्षा बलों द्वारा इस्तेमाल की जा रही 9 मिमी पिस्टल को रीप्लेस करेगी। इस मशीन पिस्टल की फायरिंग रेंज 100 मीटर है और यह इजरायल की उजी सीरीज की बंदूकों की श्रेणी में है। पिछले 4 महीनों में विकास के दौरान इस पिस्टल से 300 से अधिक राउंड फायर किए गये हैं। यह पिस्टल अब जल्द ही भारतीय सेना को सौंप दी जाएगी।

रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन (DRDO)

रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन (DRDO) की स्थापना 1958 में की गयी थी, इसका मुख्यालय नई दिल्ली के DRDO भवन में स्थित है। यह भारत सरकार की एजेंसी है। यह सैन्य अनुसन्धान तथा विकास से सम्बंधित कार्य करता है। DRDO का आदर्श वाक्य “बलस्य मूलं विज्ञानं” है। DRDO में 30,000 से अधिक कर्मचारी कार्य करते हैं। वर्तमान में DRDO के चेयरमैन डॉ. जी. सतीश रेड्डी हैं। DRDO का नियंत्रण केन्द्रीय रक्षा मंत्रालय के पास है। DRDO की 52 प्रयोगशालाओं का नेटवर्क है।

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हैदराबाद में एडवांस्ड हाइपरसोनिक विंड टनल परीक्षण सुविधा का उद्घाटन किया

हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हैदराबाद में एडवांस्ड हाइपरसोनिक विंड टनल परीक्षण सुविधा का उद्घाटन किया। इस फैसिलिटी में 5 से 12 मैक तक. का सिमुलेशन किया जा सकेगा। भारत अमेरिका और रूस के बाद ऐसा तीसरा देश होगा जिसके पास इस प्रकार की सुविधा होगी।

इसके बाद रक्षा मंत्री ने रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन के मिसाइल काम्प्लेक्स की भी यात्रा ली और विभिन्न कार्यों का जायजा लिया।

मुख्य बिंदु

इसके साथ भारत अमेरिका और रूस के बाद आकार और क्षमता में इतनी बड़ी सुविधा पाने वाला तीसरा देश बन गया है। इस परियोजना का निर्माण स्वदेशी रूप से किया गया है। इस विंड टनल में मिसाइल और एयरक्राफ्ट इत्यादि का परीक्षण किया जा सकता है। इससे एयरक्राफ्ट और मिसाइलों के एयरो-डायनामिक डिजाईन को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी और इनके प्रदर्शन में सुधार होगा।

रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन (DRDO)

रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन (DRDO) की स्थापना 1958 में की गयी थी, इसका मुख्यालय नई दिल्ली के DRDO भवन में स्थित है। यह भारत सरकार की एजेंसी है। यह सैन्य अनुसन्धान तथा विकास से सम्बंधित कार्य करता है। DRDO का आदर्श वाक्य “बलस्य मूलं विज्ञानं” है। DRDO में 30,000 से अधिक कर्मचारी कार्य करते हैं। वर्तमान में DRDO के चेयरमैन डॉ. जी. सतीश रेड्डी हैं। DRDO का नियंत्रण केन्द्रीय रक्षा मंत्रालय के पास है। DRDO की 52 प्रयोगशालाओं का नेटवर्क है।

 

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