राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय

NSO ने ‘Women and Men in India, 2020’ रिपोर्ट जारी की

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के तहत कार्यरत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (National Statistical Office) ने हाल ही में ‘Women and Men in India’ रिपोर्ट जारी की। यह रिपोर्ट महत्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक संकेतकों को समेकित करती है जो देश में लिंग-अनुपात की स्थिति को चित्रित करती है। यह रिपोर्ट सालाना MoSPI द्वारा प्रकाशित की जाती है।

जनसंख्या संबंधी आंकड़े

  • 2021 में भारत की अनुमानित जनसंख्या 13 करोड़ है।
  • 2001 में लिंगानुपात 933 से बढ़कर 2011 में 943 हो गया है।
  • दिल्ली ने लिंगानुपात में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की, इसके बाद चंडीगढ़, अरुणाचल प्रदेश का स्थान है।
  • दूसरी ओर, दमन और दीव में लिंगानुपात में सबसे अधिक गिरावट आई है।

स्वास्थ्य सम्बन्धी आंकडें

  • 25-29 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं के लिए आयु विशिष्ट प्रजनन दर 4 थी।
  • शिशु मृत्यु दर 2014 में 39 से घटकर 2018 में 32 हो गई।
  • मातृ मृत्यु दर 2007-09 में 212 से घटकर 2016-18 में 113 हो गई।
  • 2018 में ग्रामीण भारत की कुल प्रजनन दर 3 थी। 2018 में शहरी क्षेत्रों में यह 1.7 थी।
  • किशोर प्रजनन दर 2017 में 13 से घटकर 2018 में 2 हो गई।
  • राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (NFHS-5) के अनुसार, गोवा, केरल, लक्षद्वीप राज्यों में लगभग 100% संस्थागत प्रसव देखा गया।
  • प्रति 1000 लोगों पर एचआईवी की घटना 2017 में 07 से घटकर 2019 में 0.05 हो गई।

शिक्षा

  • भारत की साक्षरता दर 2011 में 73 से बढ़कर 2017 में 7 हो गई है।
  • साक्षरता दर में लिंग अंतर राजस्थान, बिहार, यूपी में सबसे अधिक था।
  • 15 साल की उम्र की केवल 3% महिलाओं ने स्नातक की पढ़ाई पूरी की।दूसरी ओर, उसी उम्र के 12.8% पुरुषों ने  स्नातक की पढ़ाई की।
  • 8% महिला छात्र दसवीं कक्षा तक की शिक्षा प्राप्त कर रही थीं।

अर्थव्यवस्था में भागीदारी

  • आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण, 2018-19 के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्र में श्रमिक आबादी का अनुपात पुरुषों के लिए 1 और महिलाओं के लिए 19 था।शहरी क्षेत्रों में, यह पुरुषों के लिए 52.7 और महिलाओं के लिए 14.5 था।
  • 15 वर्ष की आयु में महिला आबादी द्वारा अर्जित प्रति घंटे औसत वेतन अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (147 रुपये प्रति घंटे) में उच्चतम था।इसके बाद लक्षद्वीप और नागालैंड का स्थान है। सबसे कम दमन और दीव, ओडिशा के राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों में था।
  • 15 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में पुरुष आबादी द्वारा अर्जित औसत वेतन लक्षद्वीप में उच्चतम (121 रुपये प्रति घंटा) था।

निर्णय लेने में भागीदारी

  • केंद्रीय मंत्रिपरिषद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 2020 में 26% है।
  • 2019 के लोकसभा चुनाव में, 437.8 मिलियन महिला मतदाता थीं।
  • पंचायती राज संस्थाओं में सबसे अधिक महिलाओं की भागीदारी राजस्थान, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ राज्यों में देखी गई।

Month:

NSO ने जीडीपी पूर्वानुमान के आंकड़े जारी किये

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने हाल ही में वित्तीय वर्ष 2021 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) पर अपना डेटा जारी किया।

मुख्य बिंदु

  • एनएसओ के अनुसार, दिसंबर तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था में 4% की वृद्धि होगी। इससे स्पष्ट होता है कि अर्थव्यवस्था मंदी से रिकवर रही है।
  • स रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि, अर्थव्यवस्था की रिकवरी मजबूत होने की उम्मीद है क्योंकि भारत में टीकाकरण कार्यक्रम सुचारू रूप से प्रगति कर रहा है।इस वजह से, जनता ने खरीदारी करने, भोजन करने और यात्रा करने का आत्मविश्वास हासिल किया है।
  • ब्लूमबर्ग सर्वेक्षण में अर्थशास्त्रियों द्वारा अनुमान के अनुसार सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में विस्तार 6% से कम था।
  • यह इस बात पर भी प्रकाश डालता है कि अर्थव्यवस्था ने रिकॉर्ड संकुचन की लगातार दो तिमाहियों के बाद तेज़ी से रिकवरी की है।
  • आंकड़ों के अनुसार, जून और सितंबर की तिमाही के लिए जीडीपी संकुचन को 4% और 7.3% तक संशोधित किया गया है।

अर्थव्यवस्था कैसे पुनर्जीवित हुई?

सरकार द्वारा लॉकडाउन प्रतिबंधों को हटाने और खर्च को बढ़ाने के बाद आर्थिक गतिविधि को फिर से शुरू करने की मदद से आर्थिक विकास को पुनर्जीवित किया गया। इसके अलावा, भारत में टीकाकरण कार्यक्रम ने इस विश्वास को और बढ़ा दिया है कि वित्त वर्ष 2021-22 में अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO)

एनएसओ एक एजेंसी है जो कि रंगराजन आयोग की सिफारिश पर बनाई गई थी। इस कार्यालय को सांख्यिकीय मानकों को लागू करने और बनाए रखने के लिए स्थापित किया गया था। रंगराजन आयोग ने भी एनएससी स्थापित करने की सिफारिश की थी। एनएसओ का गठन सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के तहत राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (NSSO) और केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (CSO) के विलय के बाद किया गया था।

Month:

वित्त वर्ष 2021 में जीडीपी में 7.7% की कमी आ सकती है  : NSO

हाल ही में राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने देश के लिए GDP का पहला अग्रिम अनुमान जारी किया है। एनएसओ के अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2020-21 में भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 7.7% की कमी आएगी।

मुख्य बिंदु

ब्लूमबर्ग के अनुसार, यह वर्ष 1952 के बाद से जीडीपी में सबसे बड़ा वार्षिक संकुचन होगा। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अनुमान भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा किए गए 7.5 प्रतिशत संकुचन अनुमान के काफी नज़दीक है। अर्थव्यवस्था विशेषज्ञों के अनुसार, वार्षिक वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.5% से 9.9% तक संकुचित होगी।

जीडीपी के अग्रिम अनुमान महत्वपूर्ण हैं क्योंकि केंद्रीय बजट अगले वित्तीय वर्ष के लिए वर्तमान कीमतों पर जीडीपी वृद्धि के लिए इन आंकड़ों  का उपयोग करता है और इसके आधार पर, राजकोषीय घाटे और कर इत्यादि की गणना की जाती है।

इस अनुमान के अनुसार, निवेश में 14.5% की कमी होने की उम्मीद है और दूसरी ओर, निजी उपभोक्ता खर्च में 9.5% की कमी होगी। हालाँकि, सरकारी खर्च बढ़ने की उम्मीद है। चूंकि केंद्र और राज्यों का खर्च वित्त वर्ष 2020-21 की पहली छमाही में नहीं बढ़ा था, इसलिए उम्मीद है कि सरकारें दूसरी छमाही में खर्च बढ़ाएंगी।

विनिर्माण में 9.4% और सेवा क्षेत्र में 8.3% की गिरावट होने के आसार हैं।  परिवहन, व्यापार, संचार सेवाओं और आतिथ्य जैसे क्षेत्रों में 2020-21 में 21.4% की भारी गिरावट देखने की उम्मीद है। कृषि में सकल मूल्य 3.4 प्रतिशत बढ़ेगा। अनुमान के अनुसार, कुछ क्षेत्र वित्तीय वर्ष की दूसरी छमाही में बेहतर सुधार दिखाएंगे।

Month:

तकनीकी मंदी (Technical Recession) क्या है?

हाल ही में राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने जुलाई-सितंबर तिमाही के आर्थिक आंकड़े जारी किये। NSO के आंकड़ों ने पुष्टि की है कि COVID-19 महामारी के प्रकोप के कारण भारत तकनीकी मंदी की चपेट में था।

मुख्य बिंदु

  • एनएसओ के आंकड़ों के अनुसार, पिछली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था में 5% का संकुचन हुआ था।
  • पिछली तिमाही से पहले, अर्थव्यवस्था में 9 प्रतिशत का संकुचन हुआ था।
  • NSO के आंकड़ों से ज़ाहिर होता है कि केंद्र सरकार द्वारा वाणिज्यिक और आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिबधों को हटाया जा रहा है, इसके बावजूद भी संकुचन हुआ है।
  • इसका तात्पर्य है कि, भारत ने 2020-2021 की पहली तिमाही में पहली बार “तकनीकी मंदी” में प्रवेश किया है।

तकनीकी मंदी क्या है?

  • तकनीकी मंदी एक ऐसी स्थिति है जहां मंदी को प्रगति में माना जाता है और जब वास्तविक जीडीपी में लगातार दो तिमाहियों में गिरावट आई है।
  • तकनीकी मंदी, मंदी से अलग है, क्योंकि “मंदी” की स्थिति में आर्थिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण संकुचन होता है।

मंदी क्या है?

यदि जीडीपी निरंतर अवधि के लिए संकुचित होती रहती है, तो माना जाता है कि अर्थव्यवस्था मंदी की स्थिति में है। हालाँकि, मंदी की एक सीमा है। विभिन्न अर्थशास्त्री मंदी की विभिन्न परिभाषाओं का उपयोग करते हैं।

कुछ लोग मंदी की स्थिति को निर्धारित करने के लिए केवल जीडीपी का उपयोग कर सकते हैं, जबकि अन्य विनिर्माण उत्पादन, खपत या रोजगार का उपयोग कर सकते हैं ताकि अर्थव्यवस्था का एक मजबूत मूल्यांकन प्रदान किया जा सके।

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