रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड

कृष्णा गोदावरी बेसिन के आर-क्लस्टर में गैस का उत्पादन करेंगे रिलायंस और ब्रिटिश पेट्रोलियम

हाल ही में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और ब्रिटिश पेट्रोलियम ने आर क्लस्टर से गैस उत्पादन शुरू करने की घोषणा की। R क्लस्टर एशिया का सबसे गहरा ऑफ-शोर गैस क्षेत्र है।यह रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और ब्रिटिश पेट्रोलियम द्वारा संयुक्त रूप से विकसित की गई तीन डीप-वाटर गैस परियोजनाओं में से पहली है।

आर क्लस्टर क्या है?

R क्लस्टर एक ऑफ-शोर गैस फील्ड है जो कृष्णा गोदावरी बेसिन के KG-D6 ब्लॉक का एक हिस्सा है। इस ब्लॉक में अन्य 2 गहरे पानी की गैस परियोजनाएं सैटेलाइट क्लस्टर और एमजे गैस क्षेत्र हैं। R क्लस्टर एशिया में सबसे गहरा ऑफ-शोर गैस क्षेत्र है और इसमें 12.9 MMSCMSD का उत्पादन होने की उम्मीद है, जो वर्तमान में भारत के प्राकृतिक गैस उत्पादन का 10% है।

ब्रिटिश पेट्रोलियम और रिलायंस तीनों क्षेत्रों पर संयुक्त रूप से 40,000 करोड़ रुपये का निवेश कर रहे हैं। इसका उत्पादन मई 2020 तक शुरू होना था लेकिन COVID-19 के कारण इसमें देरी हुई। टेलाइट  क्लस्टर में उत्पादन 2021-22 में शुरू होगा।

यह काकीनाडा तट से मौजूदा KG D6 कंट्रोल और राइजर प्लेटफार्म से 60 किलो मीटर की दूरी पर स्थित है।

आर-क्लस्टर का महत्व

प्राकृतिक गैस के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए इन तीन परियोजनाओं की योजना बनाई जा रही है। इससे 2030 में भारत के उर्जा क्षेत्र में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी 6.2% से बढ़कर अब 15% हो जाएगी। इससे आयात पर भारत की निर्भरता कम होगी और ऊर्जा सुरक्षा में सुधार होगा।

भारत में प्राकृतिक गैस

मार्च 2018 तक भारत में अनुमानित प्राकृतिक गैस का भंडार 1,339 बिलियन क्यूबिक मीटर था। देश में सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस भंडार पूर्वी और पश्चिमी अपतटीय क्षेत्र में स्थित है। भारत में पहला प्राकृतिक गैस भंडार 1889 में असं के डिगबोई में खोजा गया था। भारत में, प्राकृतिक गैस का उपयोग उर्वरक, इस्पात, पेट्रोकेमिकल और बड़े पैमाने पर शहरीगैस वितरण में किया जाता है।

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तेंदुओं के बचाव और पुनर्वास के लिए गुजरात की पीपीपी परियोजना : जानिए महत्वपूर्ण तथ्य

हाल ही में गुजरात के वन विभाग ने 12 तेंदुओं को जामनगर में एक निजी बचाव और पुनर्वास केंद्र में स्थानांतरित कर दिया है। इन तेंदुओं को मनुष्यों के साथ संघर्ष के दौरान जंगलों से पकड़ा गया था।

मुख्य बिंदु

यह परियोजना राज्य में इस प्रकार की पहली परियोजना है। इस परियोजना को रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और राज्य सरकार के बीच सार्वजनिक निजी भागीदारी के तहत क्रियान्वित किया जा रहा है।

इन तेंदुओं को जूनागढ़ के सक्कर बाग़ जूलॉजिकल पार्क (Sakkar Baug Zoological Park) से जामनगर में स्थित ग्रीन्स जूलॉजिकल रेस्क्यू एंड रिहेबिलिटेशन किंगडम में स्थानांतरित किया गया है।

भारत में तेंदुओं की जनगणना

पिछली बार, भारत में तेंदुओं की औपचारिक जनगणना 2014 में की गई थी। इस जनगणना में अनुमान लगाया कि देश में तेंदुओं की आबादी 12,000 से 14,000 के बीच है।

तेंदुओं की संरक्षण स्थिति

तेंदुए भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-1 में सूचीबद्ध हैं। वे CITES के परिशिष्ट 1 में शामिल हैं। इसके अलावा, तेंदुओं को IUCN की रेड लिस्ट में ‘असुरक्षित’ के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

तेंदुआ

तेंदुआ एक निशाचर जानवर हैं। सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ स्टडीज एंड वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार उनकी आबादी में 75% से 90% की गिरावट आई है। अब तक तेंदुओं की नौ उप-प्रजातियों की पहचान की जा चुकी है।

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