व्लादिमीर पुतिन

बाईडेन-पुतिन शिखर सम्मेलन : मुख्य बिंदु

हाल के वर्षों में रूस और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) के साथ अपने पहले शिखर सम्मेलन से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाईडेन (Joe Biden) जिनेवा पहुंचे।

मुख्य बिंदु

  • ब्रसेल्स और ब्रिटेन में नाटो और G7 शिखर सम्मेलन के दौरान वाशिंगटन के निकटतम सहयोगियों के साथ संबंध सुधारने के बाद जो बाईडेन ने जिनेवा के लिए उड़ान भरी।
  • 2018 के बाद से अमेरिका और रूस के बीच यह पहली मुलाकात होगी।
  • यह शिखर सम्मेलन ला ग्रेंज विला और उसके आसपास के पार्क में होगा।

अमेरिका-रूस संबंध (US-Russia Relation)

अमेरिका और रूस के बीच संबंध दुनिया भर में सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों में से एक है। दोनों देशों के परमाणु सुरक्षा और अप्रसार, आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद का मुकाबला करने, यूरोप और यूरेशिया में क्षेत्रीय सुरक्षा और मध्य पूर्व में उथल-पुथल के प्रबंधन सहित विविध क्षेत्रों में साझा हित हैं। रूस जलवायु परिवर्तन और अंतरिक्ष अन्वेषण से निपटने के अमेरिकी प्रयासों में भी एक महत्वपूर्ण भागीदार है।

चिंताएं

दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध पिछले दो दशकों में सहयोग और टकराव के साथ मिले-जुले रहे हैं। हालांकि, यूक्रेन और सीरिया में संघर्ष से संबंधित तनाव इन संबंधों ख़राब कर रहा है।

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रूस औपचारिक रूप से ओपन स्काईज संधि (Open Skies Treaty) से अलग हुआ

अमेरिका के 2020 में समझौते से हटने के बाद, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल ही में ओपन स्काई संधि से रूस की वापसी को औपचारिक रूप देने वाले कानून पर हस्ताक्षर किए।

मुख्य बिंदु

  • ओपन स्काईज संधि एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है जो राष्ट्रों को पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक दूसरे के सैन्य बलों के बारे में जानकारी एकत्र करने की अनुमति देती है। रूस पर उल्लंघन करने का आरोप लगाने के बाद नवंबर 2020 में अमेरिका इस संधि से हट गया।

ओपन स्काइज संधि (Open Skies Treaty)

सोवियत संघ के विघटन के बाद 1992 में ओपन स्काइज संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह पहली बार 1955 में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ड्वाइट आइजनहावर द्वारा शीत युद्ध के तनाव को कम करने के लिए प्रस्तावित की गयी थी। नाटो के सदस्यों और पूर्व वारसा संधि देशों के बीच इस संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे। 2002 में, 35 से अधिक देशों ने इस संधि पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें अमेरिका और रूस भी शामिल थे। भारत, ओपन स्काइज संधि का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है।

प्रमुख विशेषताऐं

ओपन स्काईज संधि का लक्ष्य अपने हस्ताक्षरकर्ताओं के बीच विश्वास पैदा करना है। इस संधि के अनुसार, एक सदस्य देश सहमति प्राप्त करने के बाद ही मेजबान राष्ट्र के किसी भी हिस्से की जासूसी कर सकता है। साथ ही, कोई सदस्य राज्य 72 घंटे से पहले नोटिस देने के बाद मेजबान राज्य की हवाई तस्वीरें ले सकता है।

रूस और अमेरिका

अमेरिका ने आरोप लगाया है कि रूस ओपन स्काइज संधि के अनुरूप नहीं है। दूसरी ओर, रूस के अनुसार, इस संधि से अमेरिका की वापसी ने इसके कार्यान्वयन में असंतुलन पैदा कर दिया है। यही रूस के पीछे हटने का कारण है।

अन्य संधियाँ

अमेरिका और रूस ने 2019 में इंटरमीडिएट रेंज न्यूक्लियर फोर्स ट्रीटी (INF) को छोड़ दिया था। INF के अनुसार, दोनों देशों ने परमाणु हथियारों की दौड़ को कम करने के लिए घातक मिसाइल सिस्टम को नष्ट करने पर सहमति व्यक्त की।

 

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चीन-रूस शुरू करेंगे सबसे बड़ी परमाणु ऊर्जा परियोजना

19 मई, 2021 को चीन और रूस ने सबसे बड़ी परमाणु ऊर्जा परियोजना लांच की। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) और चीनी राष्ट्रपति शी जिंग पिंग (Xi Jing Ping) ने इस समारोह में भाग लिया।

पृष्ठभूमि

2018 में, रूस और चीन ने परमाणु ऊर्जा सहयोग परियोजना पर एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के तहत, दोनों देश शुदापु (Xudapu) परमाणु ऊर्जा संयंत्र की इकाई तीन और इकाई चार और तियानवान परमाणु ऊर्जा संयंत्र (Tianwan Nuclear Power Plant) की इकाई 7 और इकाई 8 के निर्माण पर सहमत हुए थे।

परियोजना के बारे में

उपरोक्त चार इकाइयों का निर्माण देशों के बीच विज्ञान और प्रौद्योगिकी नवाचार और हाई-एंड उपकरण निर्माण के क्षेत्र में सहयोग का परिणाम है। इस परियोजना का अनुबंध मूल्य 20 बिलियन डालर है। इस परियोजना में उपयोग किए जाने वाले परमाणु रिएक्टर तीसरी पीढ़ी के VVER-1200 रिएक्टर हैं। पूरा होने के बाद, यह रिएक्टर 37.6 अरब किलोवाट ऑवर बिजली पैदा करेंगे। साथ ही वे 30.68 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड को कम करेंगे और जीवाश्म ईंधन के उपयोग को भी कम करेंगे।

पृष्ठभूमि

यह परियोजना इस बात का मज़बूत प्रमाण है कि मानवाधिकार उल्लंघन सहित कई मुद्दों पर यूरोपीय संघ और अमेरिका के भारी दबाव का सामना करने के बाद रूस और चीन अपने घनिष्ठ संबंध बढ़ा रहे हैं। कोयले से चलने वाले संयंत्रों पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए चीन अपने परमाणु विकास में तेजी ला रहा है। ऐसा 2060 तक कार्बन न्यूट्रल बनने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए किया जा रहा है।

चीन की परमाणु शक्ति

अप्रैल 2021 तक, चीन में  39 परमाणु ऊर्जा संयंत्र हैं। इसके साथ चीन परमाणु शक्तियों के बीच तीसरे स्थान पर है। दूसरी ओर चीन अपनी तीसरी पीढ़ी की परमाणु तकनीक Hualong Two को भी आगे बढ़ा रहा है। चीन ने 2035 तक 200 गीगावॉट परमाणु क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है।

 

 

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भारत-रूस 2+2 संवाद (India-Russia 2+2 Dialogue) : मुख्य बिंदु

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) ने हाल ही में “2 + 2 मंत्रिस्तरीय संवाद” स्थापित करने के लिए सहमति व्यक्त की है। रक्षा मंत्रियों और विदेश मंत्रियों के बीच “2 + 2 मंत्रिस्तरीय” संवाद होता है।

2+2 संवाद (2+2 Dialogue)

  • भारत अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ 2+2 संवाद का आयोजन करता है।
  • रूस ऐसा पहला गैर-QUAD सदस्य है जिसके साथ भारत इस तरह के संवाद का आयोजन करेगा।
  • 2021 में, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत-रूस द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के लिए भारत का दौरा करेंगे। इस शिखर सम्मेलन को बारी-बारी से भारत और रूस में आयोजित किया जाता है।

भारत-रूस (India-Russia)

  • वर्तमान में, रूस भारत का सबसे बड़ा रक्षा आपूर्तिकर्ता है। साथ ही, भारत की प्रमुख रक्षा प्रणाली जैसे S-400 को रूस से खरीदा गया है।
  • दोनों देश शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organisation) और ब्रिक्स (BRICS) के सदस्य हैं।
  • रूस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (United Nations Security Council) में सदस्यता के लिए भारत का समर्थन करता है।
  • दोनों देशों ने पहले 2025 तक 30 बिलियन डालर के व्यापार का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस संवाद से उन्हें इस लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।इससे पहले, दोनों देशों ने अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (North-South Transport Corridor), यूरेशियन आर्थिक संघ (Eurasian Economic Union) और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री गलियारे (Chennai-Vladivostok Maritime Corridor) में सहयोग स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की है।
  • भारत द्वारा मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के लिए चुने गए अंतरिक्ष यात्रियों को रूस द्वारा प्रशिक्षित किया गया था।
  • तमिलनाडु के कुडनकुलम में बनने वाला परमाणु ऊर्जा संयंत्र रूसी सहयोग से बनाया गया है।
  • भारत ने हाल ही में रूस के स्पुतनिक वी वैक्सीन को मंजूरी दी है। यह COVAXIN और COVISHIELD के बाद देश में मंज़ूरी प्राप्त करने वाला तीसरा टीका है।

भारत-रूस संबंधों पर समझौते

1971 में, भारत और रूस ने शांति और मित्रता की संधि पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता देशों के बीच साझा लक्ष्यों की अभिव्यक्ति था। 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद, भारत और रूस ने सैन्य-तकनीकी सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

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US Leaders Summit : शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे शी जिंग पिंग

चीनी राष्ट्रपति शी जिंग पिंग (Xi Jing Ping) को विश्व पृथ्वी दिवस (22 अप्रैल) पर आयोजित होने वाले US Leaders Summit में भाग लेंगे।साथ ही, शी जिंग पिंग इस शिखर सम्मेलन में एक महत्वपूर्ण भाषण देंगे। चीन के अलावा, 40 से अधिक नेता शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। इसमें भारत के पीएम मोदी भी शामिल हैं।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी इस शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे और एक भाषण देंगे।

शिखर सम्मेलन में भारत

इस शिखर सम्मेलन के दौरान भारत के “नेट-जीरो” उत्सर्जन की घोषणा करने पर कई बहसें हुईं। यदि भारत 2050 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन को अपनाना चाहता है तो उसे भारी बोझ उठाना पड़ेगा।

नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने के लिए भारत को क्या करना चाहिए?

  • भारत को सेक्टोरल लो-कार्बन डेवलपमेंट पाथवे अपनाने चाहिए।इससे रोजगार सृजन, कम प्रदूषण, प्रतिस्पर्धा में मदद मिलेगी।
  • विद्युत क्षेत्र को डीकार्बनाईज किया जाना चाहिए।यह देश में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का सबसे बड़ा स्रोत है। कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का 40% से अधिक बिजली उत्पादन से आता है।
  • भारत को अपनी कोयले से चलने वाली बिजली क्षमता को नहीं बढ़ाना चाहिए।
  • विशेष रूप से बिजली भंडारण और स्मार्ट ग्रिड में अधिक नवीन तकनीकों को अपनाया जाना चाहिए।
  • एक बहु-हितधारक आयोग स्थापित किया जाएगा। इसमें सरकारों और प्रभावित समुदायों के सभी स्तरों का प्रतिनिधित्व होना चाहिए।

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