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DRDO ने SAHAYAK-NG का सफल परीक्षण किया

रक्षा अनुसंधान व  विकास संगठन (DRDO) ने भारतीय नौसेना के साथ गोवा के तट पर भारतीय नौसेना के IL 38SD एयरक्राफ्ट से एयर ड्राप्ड कंटेनर SAHAYAK-NG का सफल परीक्षण किया। SAHAYAK-NG भारत में स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित पहला एयर ड्राप्ड कंटेनर है। इस कंटेनर में सामान को रख कर, इसे एयरक्राफ्ट या हेलीकाप्टर

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सरकार ने आकाश मिसाइल प्रणाली के निर्यात को मंजूरी दी

हाल ही में भारत सरकार ने स्वदेशी आकाश मिसाइल प्रणाली के निर्यात को मंजूरी दे दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस कदम का स्वागत किया है और कहा है कि यह भारत को रक्षा निर्यात से अपने राजस्व को बढ़ाने में मदद करेगा। मुख्य बिंदु प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने आकाश मिसाइल प्रणाली

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MRSAM मिसाइल का परीक्षण किया गया

हाल ही में मध्यम दूरी की सतह से हवा में मिसाइल MRSAM का परीक्षण किया गया। इसे संयुक्त रूप से रक्षा अनुसंधान विकास संगठन और इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज द्वारा विकसित किया गया था। MRSAM MRSAM एक कमांड कंट्रोल सिस्टम है जो रडार, मोबाइल लॉन्चर सिस्टम और मिसाइलों को ट्रैक करता है। यह आठ कैनिस्टराइज्ड मिसाइलों को दो

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भारतीय नौसेना अमेरिका से ले सकती  है F/A-18 सुपर हॉर्नेट फाइटर जेट

अमेरिका की बोइंग कंपनी F/A-18 सुपर होर्नेट लड़ाकू विमान का निर्माण करती है। हाल ही में F/A-18 सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमान ने स्की-जंप का सफल प्रदर्शन किया है। इसके बाद, यह लड़ाकू विमान भारतीय नौसेना के विमान वाहक के लिए उपयुक्त बन गया है। इस विमान ने सभी आवश्यक पैरामीटर्स को पूरा कर लिया है। मुख्य

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हैदराबाद में एडवांस्ड हाइपरसोनिक विंड टनल परीक्षण सुविधा का उद्घाटन किया

हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हैदराबाद में एडवांस्ड हाइपरसोनिक विंड टनल परीक्षण सुविधा का उद्घाटन किया। इस फैसिलिटी में 5 से 12 मैक तक. का सिमुलेशन किया जा सकेगा। भारत अमेरिका और रूस के बाद ऐसा तीसरा देश होगा जिसके पास इस प्रकार की सुविधा होगी। इसके बाद रक्षा मंत्री ने रक्षा

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DRDO बनाएगा 6 नए ‘एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल प्लेन’ (AEW&C)

भारत ने वायुसेना की निगरानी क्षमता में सुधार करने के लिए 6 नए ‘एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल प्लेन’ (AEW&C) का निर्माण करने का फैसला लिया है। इस विमानों का निर्माण रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा किया जायेगा। इन विमानों की सहायता से भारतीय वायुसेना चीन और पाकिस्तान के साथ लगने वाली सीमा

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