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गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री माधवसिंह सोलंकी का निधन

गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री माधवसिंह सोलंकी का हाल ही में निधन हो गया है। वे 94 वर्ष के थे। उन्होंने भारत के विदेश मंत्री के रूप में भी कार्य किया है। इसके अलावा वे 3 बार कांग्रेस के मुख्यमंत्री रहे। वे पूर्व केन्द्रीय मंत्री भरतसिंह सोलंकी के पिता हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है।

माधवसिंह सोलंकी

माधवसिंह सोलंकी का जन्म 30 जुलाई, 1927 को हुआ था। वे कांग्रेस के एक प्रमुख नेता थे। उन्होंने तीन बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। वे 24 दिसम्बर, 1976 से 10 अप्रैल, 1977 के दौरान पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री बने। इसके बाद वे 7 जून, 1980 से 6 जुलाई, 1985 के बीच दूसरी बार गुजरात के मुख्यमंत्री बने। वे 10 दिसम्बर, 1989  से 4 मार्च, 1990 के दौरान तीसरी बार गुजरात के मुख्यमंत्री बने। इसके बाद वे 21 जून, 1991 से 31 मार्च, 1992 के बीच भारत के विदेश मंत्री रहे। इसके अलावा वे दो बार राज्यसभा के लिए भी चुने गये।

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कांग्रेस के दिग्गज नेता मोतीलाल वोरा का निधन

21 दिसम्बर, 2020 को कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता मोतीलाल वोरा का निधन हुआ, वे 93 वर्ष के थे। गौतलब है कि वे अक्टूबर में कोरोनावायरस संक्रमित पाए गये थे और उन्हें एम्स में भर्ती करवाया गया था।

मोतीलाल वोरा

मोतीलाल वोरा कांग्रेस पार्टी के एक प्रमुख नेता थे, वे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे हैं। इसके अलावा वे एक पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता भी थे। मोतीलाल वोरा का जन्म 20 दिसम्बर, 1927 को हुआ था। उन्होंने अपनी शिक्षा रायपुर और कलकत्ता से पूरी की। शुरुआत में उन्होंने कई वर्षों तक विभिन्न समाचार पत्रों के लिए कार्य किया।

राजनीती करियर के आरम्भ में वे समाजवादी पार्टी से जुड़े हुए थे। 1968 में दुर्ग की म्युनिसिपल कमिटी के सदस्य बने थे। बाद में, 1970 में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए। 1972 में वे कांग्रेस के टिकट पर मध्य प्रदेश विधानसभा के लिए चुने गये। इसके बाद 1977 और 1980 में वे फिर से विधानसभा सदस्य बने। वे 13 मार्च, 1985 को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री नियुक्त किये गये थे। बाद में केंद्र सरकार में शामिल होने के लिए उन्होंने 13 फरवरी, 1988 को मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफ़ा दे दिया था।

14 फरवरी, 1988 को वे राज्यसभा के सदस्य बने और उन्हें केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और नागरिक उड्डयन मंत्रालय का कार्यभार सौंपा गया। इसके अतिरिक्त 1993 से 1996 के बीच वे उत्तर प्रदेश के राज्यपाल भी रहे।

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