Pakistan

शाहीन 1-ए : पाकिस्तान ने परीक्षण परमाणु-सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया

पाकिस्तान ने 26 मार्च, 2021 को परमाणु-सक्षम सतह से सतह पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल शाहीन (Shaheen-1A) का सफल परीक्षण किया है। इस मिसाइल की रेंज 900 किलोमीटर है।

मुख्य बिंदु

पाकिस्तान ने उन्नत नेविगेशन प्रणाली सहित हथियार प्रणाली के विभिन्न डिजाइनों और तकनीकी मापदंडों को फिर से वेलिडेट करने के उद्देश्य से शाहीन-1 ए सतह का परीक्षण किया। सेना के मीडिया विंग के मुताबिक, इस मिसाइल की रेंज 900 किलोमीटर है। इस मिसाइल में एक परिष्कृत और उन्नत मार्गदर्शन प्रणाली शामिल है जो इसे अत्यधिक सटीक मिसाइल प्रणाली बनाती है।

पृष्ठभूमि

पाकिस्तान ने फरवरी, 2021 में परमाणु क्षमता वाली सतह से सतह पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया था जो 290 किलोमीटर तक के लक्ष्य को भेद सकती है।

शाहीन-I (Shaheen-I)

यह पाकिस्तान की जमीन पर आधारित सुपरसोनिक और शॉर्ट-टू-मीडियम रेंज सरफेस टू सतह गाइडेड बैलिस्टिक मिसाइल है। यह NESCOM और नेशनल डिफेंस कॉम्प्लेक्स (NDC) के संयुक्त उद्यम द्वारा संयुक्त रूप से डिजाइन और विकसित किया की गया है। इस मिसाइल को पाकिस्तान के पहाड़ों में रहने वाले एक बाज़ की एक प्रजाति के नाम पर रखा गया है। इसे हत्फ IV (Hatf IV) भी नामित किया गया है। इसमें 750 किमी की इष्टतम रेंज है जो दो-चरण ठोस-ईंधन रॉकेट मोटर द्वारा संचालित है।

शाहीन-I की विशेषताएं

यह प्रणाली मिसाइल को अपने प्रक्षेपवक्र को संशोधित करने, सटीकता में सुधार करने की अनुमति देती है और मिसाइल रक्षा प्रणालियों से बचने की क्षमता प्रदान करती है। यह टर्मिनल गाइडेंस सिस्टम तकनीक पर आधारित है। यह तकनीक वारहेड्स के प्रक्षेपवक्र को समायोजित करने के लिए छोटे थ्रस्टरों को फायर करके वॉरहेड सटीकता को बेहतर बनाने में मदद करती है।

Month:

पाकिस्तान-कतर ने तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए

पाकिस्तान ने तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) को लेकर कतर के साथ दस साल का समझौता किया है। नए समझौते पर दोनों देशों द्वारा हस्ताक्षरित अन्य सौदों की तुलना में काफी कम दर पर हस्ताक्षर किए गए थे।

समझौते का महत्व

पाकिस्तान और कतर के बीच नए समझौते से पाकिस्तान के लिए अगले 10 वर्षों में लगभग 3 बिलियन डॉलर की बचत करने में मदद मिलेगी।

मुख्य बिंदु

2015 के पिछले PML-N समझौते की तुलना में इस समझौते पर लगभग 31 प्रतिशत कम दर पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते पर 10 साल के लिए हस्ताक्षर किए गए हैं जो दुनिया में सबसे कम कीमत वाली सार्वजनिक गैस का अनुबंध है। नए अनुबंध के अनुसार, पाकिस्तान पूर्व समझौते से लगभग 316 मिलियन डॉलर कम भुगतान करेगा।  इससे एलएनजी आयात में लगभग $ 3 बिलियन की बचत होगी। दोनों देशों के बीच एक साल की लंबी बातचीत के बाद इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।

समझौते के बारे में

लंबी अवधि के अनुबंध पर ब्रेंट के 10.2 प्रतिशत की दर से हस्ताक्षर किए गए थे। इस समझौते के साथ, पाकिस्तान एक दिन में 200 मिलियन क्यूबिक फीट (mmcfd) एलएनजी का आयात करेगा। इससे पहले, पाकिस्तान ने 2015 में ब्रेंट के 13.37 प्रतिशत की दर से एलएनजी के 500 एमएमसीएफडी का आयात किया था। इस सौदे के तहत, पाकिस्तान को जनवरी 2022 से प्रति वर्ष कतर पेट्रोलियम से 3 मिलियन टन एलएनजी प्राप्त होगी।

तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG)

यह प्राकृतिक गैस है जो मुख्य रूप से ईथेन (C2H6) के मिश्रण के साथ मीथेन (CH4) से बनती है। इस प्राकृतिक गैस को सुरक्षित रूप से स्टोर और परिवहन करने के लिए इसे तरल रूप में परिवर्तित करने के लिए ठंडा किया जाता है।

Month:

FATF की ‘ग्रे लिस्ट’ में पाकिस्तान को बरकरार रखा गया

ग्लोबल एंटी-टेररिस्ट वॉचडॉग फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने 25 फरवरी, 2021 को पाकिस्तान को जून 2021 तक ग्रे लिस्ट में बनाए रखने का फैसला किया है।

मुख्य बिंदु

  • FATF द्वारा यह निर्णय आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए 27-सूत्रीय कार्ययोजना का पूरी तरह से पालन करने में देश की विफलता के मद्देनजर लिया गया था।
  • यह निर्णय एक वर्चुअल सत्र के बाद लिया गया था।
  • FATF ने पाकिस्तान को ‘ग्रे लिस्ट’ में रखने का फैसला किया है।
  • हालांकि, पाकिस्तान ने कई कदम उठाए हैं, लेकिन उसे 27 कार्रवाई बिंदुओं में से तीन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर कार्रवाई करने की आवश्यकता है।

FATF ने क्या कहा?

FATF ने कहा कि, पाकिस्तान को 27 बिन्दुओं में से शेष तीन बिन्दुओं को लागू करने पर काम करने की आवश्यकता है:

  1. इसे नामित व्यक्तियों या संस्थाओं की ओर से कार्य करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को लक्षित करते हुए आतंकीफंडिंग जांच और अभियोगों को प्रदर्शित करने की आवश्यकता है।
  2. यह प्रदर्शित करने की आवश्यकता है कि आतंकी फंडिंग के मुकदमों के परिणामस्वरूप प्रभावी प्रतिबंध लगाये गये हैं।
  3. इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1267 और 1373 में नामित आतंकवादियों के खिलाफ लक्षित वित्तीय प्रतिबंधों के प्रभावी कार्यान्वयन का प्रदर्शन करने की आवश्यकता है।

पृष्ठभूमि

FATF ने अक्टूबर, 2020 में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में रखा था और तय किया था कि FATF विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और यूरोपीय संघ से पाकिस्तान को सहायता प्राप्त करने की अनुमति नहीं देगा। भारत ने एफएटीएफ का सदस्य होने के नाते पाकिस्तान को बार-बार वित्तीय अपराधों को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए कहा है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव 1267

यह संकल्प 15 अक्टूबर, 1999 को अपनाया गया था। इस संकल्प के तहत, परिषद ने ओसामा बिन लादेन और सहयोगियों को आतंकवादी के रूप में घोषित किया था।

Month:

भारत और पाकिस्तान ने परमाणु ठिकानों की सूची का आदान-प्रदान किया

भारत और पाकिस्तान ने 1 जनवरी, 2021 को अपने-अपने परमाणु ठिकानों की सूची का आदान प्रदान किया। यह आदान-प्रदान भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु ठिकानों पर हमले के विरुद्ध समझौते (Agreement on Prohibition of Attacks against Nuclear Installations and Facilities) के तहत किया गया। गौरतलब है कि भारत और पाकिस्तान हर साल 1 जनवरी को अपने परमाणु ठिकानों की सूची एक-दूसरे के साथ साझा करते हैं। इसका उद्देश्य उन्हें एक-दूसरे के परमाणु संस्थानों पर हमले करने से रोकना है।

परमाणु ठिकानों पर हमले के विरुद्ध समझौता (Agreement on Prohibition of Attacks against Nuclear Installations and Facilities)

इस समझौते पर भारत और पाकिस्तान ने 31 दिसम्बर, 1988 को हस्ताक्षर किये थे, यह 27 जनवरी, 1991 को लागु हुआ था। इस समझौते के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं :

  • भारत और पाकिस्तान इस प्रकार की प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष गतिविधियों में शामिल नहीं होंगे जिससे दूसरे देश के परमाणु ठिकाने को किसी भी प्रकार का नुकसान हो।
  • भारत और पाकिस्तान प्रत्येक वर्ष 1 जनवरी को अपने परमाणु ठिकानों की सूची का आदान-प्रदान करेंगे। यह आदान-प्रदान सूची में परिवर्तन के समय भी किया जाया है।
  • दोनों देशों ने सौहार्दपूर्ण द्विपक्षीय रिश्ते कायम करने के लिए इस समझौते पर हस्ताक्षर किये थे। यह आदान-प्रदान आपसी विश्वास में वृद्धि करने के लिए भी काफी उपयोगी है।

Month:

करीमा बलोच कौन हैं?

पाकिस्तानी मूल की करीमा बलोच की हाल ही में मृत्यु हो गयी है, वे कुछ दिनों से लापता थीं। उनकी मृत्यु कनाडा के टोरंटो में हुई है। करीमा बलोच एक मानवाधिकार कार्यकर्ता थीं, वे अक्सर बलोचिस्तान में पाकिस्तानी सेना की बर्बरता का विरोध करती रहती थीं। उन्होंने बलोचिस्तान में मानवाधिकार हनन के विरुद्ध लगातार अपनी आवाज़ उठाई है। वे पाकिस्तानी सरकार के आलोचक मानी जाती थीं।

मुख्य बिंदु

करीमा बलोच बलोचिस्तान की एक प्रसिद्ध हस्ती थीं। करीमा बलोच को बलोचिस्तान की महिला एक्टिविज्म का अग्रणी माना जाता है। उन्होंने स्विट्जरलैंड में संयुक्त राष्ट्र के सत्र में बलोचिस्तान का मुद्दा उठाया था। उन्हें 2016 में दुनिया की 100 सबसे “प्रेरणादायक और प्रभावशाली” महिलाओं में से एक के रूप में नामित किया गया था।

मई 2019 में एक साक्षात्कार में, उन्होंने पाकिस्तान पर संसाधनों को छीनने और बलोचिस्तान के लोगों का नरसंहार करने का आरोप लगाया था। बलोचिस्तान का -सामरिक महत्व काफी अधिक है और यह क्षेत्र प्राकृतिक संसाधन भंडार से भरपूर है। बलोचिस्तान में पाकिस्तानी सेना पर अक्सर मानवाधिकार हनन और बर्बरता के आरोप लगते रहते हैं। बलोचिस्तान में इस कारण कई हिंसक घटनाएँ भी हुई हैं।

करीमा बलोच 37 वर्ष की थीं। वे 2017 में पाकिस्तान को छोड़कर कनाडा चली गयी थीं, जहाँ उन्होंने शरण मांगी थी। वे बलोच स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन-आजाद की पूर्व चेयरपर्सन भी थीं।

Month:

चीन और पाकिस्तान के बीच नई सैन्य डील : मुख्य बिंदु

30 नवंबर, 2020 को पीपल्स लिबरेशन आर्मी के जनरल वेई गेंग ने रावलपिंडी स्थित पाकिस्तानी सेना मुख्यालय का दौरा किया। इस बैठक के दौरान दोनों देशों ने क्षेत्रीय सुरक्षा, आपसी हित और द्विपक्षीय रक्षा सहयोग बढ़ाने के मामलों पर चर्चा की। उन्होंने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के बारे में भी चर्चा की जिसमें पाकिस्तानी सेना की अधिक भूमिका है।

दोनों देशों ने रक्षा से संबंधित एक नए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता मुख्य रूप से पाकिस्तानी सेना की क्षमता निर्माण पर केंद्रित है और 2019 में हस्ताक्षरित रक्षा समझौते का एक हिस्सा है। इस समझौते पर गुप्त रूप से हस्ताक्षर किए गए थे और इसके विवरण को गुप्त रखा गया था।

गौरतलब है कि चीन और पाकिस्तान के बीच सैन्य संबंध हाल ही के दिनों में काफी बढ़ रहे हैं।

चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC)

यह चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव की प्रमुख परियोजनाओं में से एक है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा 3000 किमी लंबा है और इसमें राजमार्ग, रेलवे और पाइपलाइन शामिल हैं। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के ढांचे के तहत, चीन पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में कोहाला पनबिजली परियोजना का निर्माण करेगा है। इसे झेलम नदी पर बनाया जायेगा। इसकी क्षमता 1,124 मेगावाट होगी।

CPEC का उद्देश्य पाकिस्तान के ग्वादर को रेलवे और राजमार्गों के नेटवर्क के माध्यम से चीन के झिंजियांग प्रांत से जोड़ना है।

भारत की चिंता

CPEC पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर क्षेत्र से होकर गुजरता है। CPEC के द्वारा से चीन ग्वादर बंदरगाह के माध्यम से अपनी सप्लाई लाइनों को छोटा करने की योजना बना रहा है। भारत के अनुसार इस क्षेत्र में चीन की व्यापक उपस्थिति हिंद महासागर में भारत के प्रभाव को कम कर देगी।

चीन-पाकिस्तान संबंध

चीन लगातार दक्षिण, पश्चिम और मध्य एशिया में अपनी उपस्थिति बढ़ा रहा है। दूसरी ओर, पाकिस्तान वर्तमान में दक्षिण एशियाई राजनीति में एक महत्वपूर्ण देश है।  ओसामा बिन लादेन की हत्या के बाद से पाकिस्तान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध फीके पड़ गए हैं। धीरे-धीरे चीन और रूस द्वारा पाकिस्तान में कम होती अमेरिकी सहायता की पूर्ती का प्रयास किया जा रहा है।

Month:

Advertisement