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पीएम मोदी ने राष्ट्रीय खिलौना मेले (National Toy Fair) का उद्घाटन किया

पीएम मोदी ने राष्ट्रीय खिलौना मेला का 27 फरवरी को उद्घाटन किया, यह 2 मार्च को समाप्त होगा। यह  आभासी प्रारूप में आयोजित किया जाएगा।

मुख्य बिंदु

  • इ आयोजन के दौरान, IIT गांधीनगर में स्थित सेंटर फॉर क्रिएटिव लर्निंग (CCL) मेले में अपनी 75 खिलौना कृतियों का प्रदर्शन करेगा।
  • IIT गांधीनगर देश का एकमात्र IIT है जो रचनात्मक सीखने के लिए इस केंद्र को चला रहा है।
  • सीसीएल विभिन्न वैज्ञानिक और शैक्षिक खिलौने विकसित करके छात्रों और शिक्षकों में वैज्ञानिक स्वभाव विकसित करने में मदद करता है।

खिलौना मेला

  • इस मेले का आयोजन कपड़ा मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है।
  • शिक्षा और वाणिज्य मंत्रालय और उद्योग मंत्रालय भी मेले के आयोजन से जुड़े हैं।
  • इस आभासी खिलौने मेले का आयोजन बच्चों के लिए एक आनंददायक शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से किया जाएगा।
  • यह बच्चों को शिक्षण, सीखने और स्वदेशी खिलौना उद्योग को बढ़ावा देने में संलग्न करेगा।
  • CCL द्वारा निम्नलिखित खिलौने प्रदर्शित किये जायेंगे :
  1. डीसी मोटर का उपयोग करके बनाया गया रोबोट।
  2. सीरिंज द्वारा नियंत्रित हाइड्रोलिक जेसीबी।
  3. दीवार से परे देखने के लिए पेरिस्कोप।
  4. साइन वेव कार के माध्यम से त्रिकोणमिति की व्याख्या।
  5. लैंप के माध्यम से ज्यामिति की आसान सीख।
  • यह मेला शिक्षा मंत्रालय, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT), राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (SCERT) और स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (DoSEL) के 75 प्रदर्शनी स्टालों का भी प्रदर्शन करेगा।

पृष्ठभूमि

खिलौना मेले का विचार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ के दौरान पेश किया गया था। उन्होंने खिलौने के बाजार की विशाल संभावनाओं और स्वदेशी खिलौनों को बढ़ावा देने के लिए इस्तेमाल किए जा सकने वाले अवसरों पर प्रकाश डाला था। हाल ही में, 11 फरवरी 2021 को, सरकार ने खिलौना मेले के लिए एक वेबसाइट लांच की थी।

 

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पीएम मोदी मैरीटाइम इंडिया समिट के दूसरे संस्करण का उद्घाटन करेंगे

बंदरगाह, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2 मार्च, 2021 को वर्चुअल मोड में मैरीटाइम इंडिया समिट (एमआईएस) के दूसरे संस्करण का उद्घाटन करेंगे।

मुख्य बिंदु

  • इसके अलावा, मंत्रालय पहले ही विभिन्न संस्थाओं के साथ कई समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर करना शुरू कर चुका है।
  • हाल ही में, मुंबई पोर्ट ट्रस्ट ने 7,400 करोड़ के एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
  • इस शिखर सम्मेलन के एक भाग के रूप में 20,000 करोड़ मूल्य के एमओयू पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
  • इस शिखर सम्मेलन का उद्घाटन सत्र मंत्री-स्तरीय भागीदारी को चिह्नित करेगा।इसमें रूस, अफगानिस्तान, ईरान, उज्बेकिस्तान और आर्मेनिया से प्रतिभागी शामिल होंगे।
  • यह एक अनूठा मंच भी प्रदान करेगा जो कि समुद्री विशेषज्ञों जैसे सेक्टर विशेषज्ञों, नीति नियोजकों, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, शिपिंग लाइन मालिकों, घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों और दुनिया के कई हिस्सों से प्रमुख बंदरगाहों के प्रतिनिधियों में हितधारकों की भागीदारी को चिह्नित करेगा।
  • इस शिखर सम्मेलन में भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बंदरगाहों, शिपिंग और समुद्री कंपनियों और निवेशकों के साथ बातचीत और सहयोग के लिए मंचों की मेजबानी भी की जाएगी।

शिखर सम्मेलन का उद्देश्य

वैश्विक समुद्री  सेक्टर में भारत को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से मैरीटाइम इंडिया समिट का आयोजन किया जा रहा है।

पृष्ठभूमि

केंद्रीय जहाजरानी मंत्री ने हाल ही में मैरीटाइम इंडिया समिट के दूसरे संस्करण के लिए एक ब्रोशर और http://www.maritimeindiasummit.in नामक एक वेबसाइट लॉन्च की है। इस वर्ष शिखर सम्मेलन को COVID-19 महामारी के कारण वर्चुअल मोड में आयोजित किया जाएगा। इस शिखर सम्मेलन के लिए प्रदर्शकों और आगंतुकों के लिए पंजीकरण 11 फरवरी, 2021 को शुरू किया गया था।

Month:

20 फरवरी : अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम का स्थापना दिवस

20 फरवरी को अरुणाचल प्रदेश तथा मिजोरम का स्थापना दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अरुणाचल प्रदेश तथा मिजोरम के लोगों को शुभकामनाएं दीं।

संक्षिप्त इतिहास

मिजोरम

मिजोरम की स्थापना के साथ मिज़ो नेशनल फ्रंट के संघर्ष का समापन हुआ, मिज़ो नेशनल फ्रंट की स्थापना 1961 में की गयी थी। इस संगठन ने ग्रेटर मिजोरम की स्वायत्त स्वतंत्रता की मांग के लिए हथियार उठाये और आइजोल, लुंगलेई, चान्गते, छिम्लुंग इत्यादि स्थानों में सरकारी संस्थानों को निशाना बनाया। भारत सरकार ने 1967 में मिज़ो नेशनल फ्रंट पर प्रतिबन्ध लगाया। इससे MNF के नेतृत्व में संघर्ष और भी तीव्र हुआ।  1972 में मिजोरम को केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया गया, परन्तु प्रदर्शनकारी इससे शांत नहीं हुए।

30 जून, 1986 को मिज़ो नेशनल फ्रंट तथा भारत सरकार ने समझौते पर हस्ताक्षर किये। इसके पश्चात् मिज़ो नेशनल फ्रंट ने हिंसा का मार्ग त्याग दिया और शीघ्र ही मिजोरम को भारत का पूर्ण राज्य बनाया गया। इसके इए मिजोरम राज्य अधिनियम, 1986 पारित किया गया था।

अरुणाचल प्रदेश

शुरू में असम का नियंत्रण असम की प्रांतीय सरकार के गवर्नर के पास था। संविधान लागू होने के बाद नार्थ ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी (NEFA) का कार्यभार असम के राज्यपाल को सौंपा गया। बाद में NEFA का नाम बदलकर अरुणाचल प्रदेश कर दिया गया। 1972 में अरुणाचल प्रदेश केंद्र शासित प्रदेश बना। 1975 में अरुणाचल प्रदेश परिषद् को अस्थायी विधानसभा में परिवर्तित किया गया तथा इसमें अरुणाचल प्रदेश के लिए मंत्रिपरिषद का गठन किया गया। 20 फरवरी, 1987 को अरुणाचल प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया, इसके लिए संविधान में 55वां संशोधन किया गया था।

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पीएम मोदी ने महाराजा सुहेलदेव स्मारक के लिए आधारशिला रखी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 फरवरी, 2021 को महाराजा सुहेलदेव स्मारक के लिए आधारशिला रखी। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में चितौरा झील के विकास कार्य की आधारशिला भी रखी गयी।

मुख्य बिंदु

  • उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी वर्चुअल कार्यक्रम में शामिल हुए।
  • इस परियोजना में महाराजा सुहेलदेव की प्रतिमा की स्थापना और एक गेस्ट हाउस, कैफेटेरिया और बच्चों के पार्क सहित विभिन्न पर्यटक सुविधाओं का विकास शामिल है।
  • इस दौरान प्रधानमंत्री ने श्रावस्ती, चित्तौरा झील और बहराइच के सौंदर्यीकरण के कार्यक्रमों का भी अनावरण किया।
  • यह आयोजन बहराइच जिले के ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व को भी उजागर करेगा।

पृष्ठभूमि

महाराजा सुहेलदेव की एक मूर्ति का अनावरण फरवरी 2016 में तत्कालीन भाजपा प्रमुख अमित शाह ने किया था। उन्होंने र एक किताब भी लॉन्च की थी। केंद्र सरकार ने भी एक डाक टिकट जारी किया और महाराजा सुहेलदेव के नाम पर एक सुपरफास्ट ट्रेन चलाने की शुरुआत की।

सुहेलदेव कौन थे?

वह श्रावस्ती से राजा थे। उन्होंने गजनवीद गाजी सैय्यद सालार मसूद को हराया और उसे मार गिराया। उन्होंने 1034 ईस्वी में बहराइच में गजनवीद जनरल को हराया।

बहराइच

यह उत्तर प्रदेश में एक शहर और एक नगरपालिका बोर्ड है। यह शहर सरयू नदी पर स्थित है जो घाघरा नदी की एक सहायक नदी है। यह शहर नेपाल के साथ एक अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करता है।

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पीएम मोदी और अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी ने बैठक में हिस्सा लिया; शहतूत बांध परियोजना के निर्माण पर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये गये

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी ने आज एक वर्चुअल शिखर सम्मेलन आयोजित किया। इस अवसर पर शहतूत बांध परियोजना के निर्माण पर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये गये। इस  समझौता ज्ञापन पर विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर और अफगानिस्तान के विदेश मंत्री हनीफ अत्तार ने हस्ताक्षर किए।

मुख्य बिंदु

यह बाँध काबुल शहर की सुरक्षित पेयजल जरूरतों को पूरा करेगा, आस-पास के क्षेत्रों को सिंचाई का पानी उपलब्ध कराएगा और क्षेत्र को बिजली भी प्रदान करेगा। यह परियोजना भारत और अफगानिस्तान के बीच नई विकास साझेदारी का एक हिस्सा है।

यह अफगानिस्तान में भारत द्वारा बनाया जा रहा दूसरा बड़ा बांध है, इससे एहले भारत-अफगानिस्तान मैत्री बांध, सलमा बांध, का उद्घाटन जून 2016 में किया गया था।  इस अवसर पर बोलते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और अफगानिस्तान के बीच सभ्यता के संबंधों पर प्रकाश डाला और एक शांतिपूर्ण, एकजुट, स्थिर, समृद्ध और समावेशी अफगानिस्तान के लिए भारत के निरंतर समर्थन का आश्वासन दिया।

इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि पिछले दो दशकों में, भारत अफगानिस्तान के विकास में सबसे प्रमुख भागीदारों में से एक रहा है। उन्होंने कहा, काबुल में शहतूत बांध पर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर दोनों देशों के बीच मजबूत दोस्ती पर आधारित है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कई परियोजनाओं, जिनके लिए भारत ने अफगानिस्तान में सहायता प्रदान की है, ने मित्रता को मजबूत करने में मदद की है और दोनों देशों को करीब लाया है। उन्होंने सभी अफगानों को आश्वासन दिया कि भारत उनके साथ खड़ा रहेगा।

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पीएम मोदी ने पश्चिम बंगाल के हल्दिया में 4,700 करोड़ रुपये की चार बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 फरवरी, 2021 को पश्चिम बंगाल के हल्दिया में 4700 करोड़ रुपये की चार बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित किया। प्रधानमंत्री ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की हल्दिया रिफाइनरी में दूसरी कैटेलिटिक-इसोडेवेक्सिंग यूनिट की आधारशिला रखी। उन्होंने भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड, बीपीसीएल के एलपीजी आयात टर्मिनल, गेल के डोभी-दुर्गापुर प्राकृतिक गैस पाइपलाइन और एनएचएआई के चार लेन रोड  ओवरब्रिज सह फ्लाईओवर सहित तीन परियोजनाओं का उद्घाटन किया।

मुख्य बिंदु

इस अवसर पर बोलते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि गैस आधारित अर्थव्यवस्था देश के लिए समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, इस जरूरत को पूरा करने के लिए एक राष्ट्र-एक गैस ग्रिड एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रधानमंत्री ने कहा की इसे प्राप्त करने के लिए, प्राकृतिक गैस की लागत को कम करने और गैस-पाइपलाइन नेटवर्क के विस्तार पर ध्यान केंद्रित किया गया है। श्री मोदी ने कहा, भारत सबसे अधिक गैस खपत करने वाले देशों में से है। उन्होंने कहा, सस्ते और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए बजट में हाइड्रोजन मिशन की घोषणा की गई है।
प्रधानमंत्री ने देश के पूर्वी भाग में जीवन और व्यवसाय की गुणवत्ता में सुधार के लिए रेल, सड़क, हवाई अड्डे, बंदरगाहों और जलमार्गों में चल रहे कार्यों को सूचीबद्ध किया।

347 किलोमीटर का डोभी-दुर्गापुर प्राकृतिक गैस पाइपलाइन खंड, जो प्रधानमंत्री उर्जा गंगा परियोजना का एक हिस्सा है, का सीधे तौर पर न केवल पश्चिम बंगाल बल्कि बिहार और झारखंड के 10 जिलों को भी लाभ होगा। इसके निर्माण कार्य ने स्थानीय लोगों को 11 लाख मानव दिवस रोजगार प्राप्त हुआ है। यह रसोईघरों को स्वच्छ पाइप एलपीजी प्रदान करेगा और स्वच्छ सीएनजी वाहनों को सक्षम करेगा। सिंदरी और दुर्गापुर उर्वरक कारखानों को निरंतर गैस की आपूर्ति मिलेगी।

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