Himachal Pradesh

हिमाचल प्रदेश में बागवानी के लिए एशियाई विकास बैंक 10 मिलियन डॉलर का ऋण प्रदान करेगा  

हाल ही में, एशियाई विकास बैंक (ADB) ने हिमाचल प्रदेश में परियोजनाओं के लिए भारत के साथ ऋण समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।हिमाचल प्रदेश में बागवानी के विस्तार के लिए एक ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

मुख्य बिंदु

एशियाई विकास ने हिमाचल प्रदेश में बागवानी को बढ़ावा देने के लिए 10 मिलियन डॉलर के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं। यह ऋण परियोजना के लिए डिजाइनिंग, क्षमता निर्माण और पायलटिंग गतिविधियों में मदद करेगा, जिसका उद्देश्य हिमाचल प्रदेश में बागवानी उत्पादन और कृषि घरेलू आय का विस्तार करना है।

इसके साथ ही भारत और एशियाई विकास बैंक (ADB) ने असम में 120 मेगा वाट जलविद्युत संयंत्र के निर्माण के लिए 231 मिलियन डालर के ऋण पर हस्ताक्षर किए हैं, इस प्लांट से घरों में बिजली की उपलब्धता में वृद्धि होगी।

एशियाई विकास बैंक (ADB)

एडीबी एक क्षेत्रीय विकास बैंक है जिसका उद्देश्य एशिया में सामाजिक और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। इसकी स्थापना दिसंबर 1966 में की गयी थी। इसका मुख्यालय मनीला (फिलीपींस) में स्थित है। इसके कुल 68 सदस्य हैं, जिनमें से 48 एशिया और प्रशांत क्षेत्र जबकि बाकी 19 अन्य क्षेत्र के हैं। एडीबी का मुख्य उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए ऋण, तकनीकी सहायता, अनुदान और इक्विटी निवेश प्रदान करके अपने सदस्यों और भागीदारों की सहायता करना है।

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हिमाचल प्रदेश ने एकीकृत नशीली दवा रोकथाम नीति की घोषणा की

हिमाचल प्रदेश सरकार ने हाल ही में एकीकृत नशीली रोकथाम, उपचार, प्रबंधन और पुनर्वास कार्यक्रम की घोषणा की, यह कार्यक्रम बहुत जल्द तैयार हो जायेगा।

एकीकृत नशीली दवा रोकथाम नीति (Integrated Drug Prevention Policy)

इस नीति की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • इस नीति को “राज्य नशीली दवा रोकथाम, उपचार, प्रबंधन और पुनर्वास कार्यक्रम” नाम दिया गया है।
  • इस नीति का उद्देश्य राज्य में नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खतरे को रोकने के लिए पुलिस, मीडिया और नशा निवारण बोर्ड के बीच सहयोग बढ़ाना है।
  • इसके लिए हिमाचल प्रदेश में 6 नशामुक्ति केंद्र खोले जायेंगे।
  • नशीली दवाओं और साइकोट्रोपिक पदार्थों उत्पादन के तरीके के बारे में जानने के लिए आधिकारिक सर्वेक्षण किया जाएगा।
  • इसके लिए ड्रग्स जागरूकता अभियान शुरू किए जाएंगे जिसमें शहरी स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधि, एनएसएस स्वयंसेवक और एनसीसी कैडेट शामिल होंगे।
  • इसके अलावा, राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल सेल को मजबूत बनाया जायेगा।
  • राज्य सरकार की नई रणनीति मुख्य रूप से अफीम और भांग जैसे पौध स्रोतों से प्राप्त नशीले पदार्थों पर ध्यान केंद्रित करेगी।राज्य सरकार ने नशीले पदार्थों वाले पौधों की खेती के खिलाफ कई कदम उठाए हैं। राज्य सरकार ने उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मुद्दों के समाधान के लिए सशस्त्र सीमा बल की भी तैनाती की थी। राज्य सरकार ने इन बलों को कैनबिस या अफीम विनाश के आधुनिक उपकरण भी प्रदान किए थे।
  • हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य के सरकारी स्कूलों के पाठ्यक्रम में नशाखोरी के दुष्प्रभावों पर एक अध्याय शुरू करेगी।
  • हिमाचल प्रदेश के पड़ोसी राज्यों में बड़ी संख्या में ड्रग पेडलर हैं।इसलिए, इस नीति के तहत संयुक्त पहल शुरू की जाएगी। इससे पहले उत्तरी राज्यों ने नशीले पदार्थों की तस्करी के संबंध में जानकारी साझा करने के लिए सहमती प्रकट की थी।

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हिमाचल की स्पीती घाटी में देखा गया दुर्लभ हिमालयन सीरो

हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी में पहली बार दुर्लभ वन्यजीव हिमालयन सीरो को देखा गया है और उसे राज्य वन्यजीव विंग द्वारा पकड़ लिया गया है। इसे स्पीति घाटी के हर्लिंग गांव में देखा गया था। यह पहली बार है जब सीरो को हिमाचल प्रदेश में देखा गया है। इस ऊंचाई पर आमतौर पर सीरो नहीं पाए जाते हैं।

हिमालयन सीरो

  • हिमालयन सीरो बकरी, गधा, एगाय और सुअर की तरह दिखता है।
  • यह एक शाकाहारी जानवर हैं।
  • सीरो आमतौर पर 2,000 मीटर और 4,000 मीटर के बीच ऊंचाई पर पाए जाते हैं।
  • वे पूर्वी, मध्य और पश्चिमी हिमालय में पाए जाते हैं।
  • उनके छोटे हाथ-पैर और खच्चर जैसे कान होते हैं।
  • उनके शरीर में काले बालों का एक कोट होता है।
  • सीरो की सभी प्रजातियां एशिया में पाई जाती हैं।
  • सीरो आमतौर पर घने जंगलों में रहते हैं।

स्थिति

पिछले एक दशक में हिमालयी सीरो की जनसंख्या, रेंज और आवास में काफी गिरावट आई है। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) की रिपोर्ट के अनुसार मानव प्रभाव के कारण सीरो की आबादी में और गिरावट आ सकती है। इससे पहले, आईयूसीएन ने सीरो को ‘लगभग संकटग्रस्त’ (nearly threatened) श्रेणी में रखा था। हालाँकि, अब हिमालयन सीरो को ‘असुरक्षित’ श्रेणी में रखा गया है।

सुरक्षा

इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची I के तहत संरक्षण दिया गया है।

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