पत्रकारिता और शोध संगठन पॉयन्टर इंस्टीट्यूट के इंटरनेशनल फैक्ट-चेकिंग नेटवर्क (IFCN) ने किस सोशल मीडिया हैंडल पर अपना चैटबॉट लॉन्च किया?

उत्तर – व्हाट्सएप अमेरिका बेस्ड पत्रकारिता व शोध संगठन पॉयन्टर इंस्टीट्यूट के इंटरनेशनल फैक्ट-चेकिंग नेटवर्क (IFCN) ने व्हाट्सएप पर अपना चैटबॉट लॉन्च किया। IFCN अपनी आचार संहिता के आधार पर तथ्य-जांच करने वाले संगठनों की समीक्षा करता है। इस नवीनतम व्हाट्सएप बॉट का उपयोग करके दुनिया भर के लोग यह जांच सकते हैं कि क्या

‘India SME Services Platform’ भारत के किस वित्तीय संस्थान की एक डिजिटल पहल है?

उत्तर – भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) लखनऊ स्थित भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) ने हाल ही में घोषणा की कि वह ‘India SME Services Platform’  नाम से एक डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च करेगा। यह प्लेटफार्म सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को परिचालन शुरू करने, वित्त या ऋण बढ़ाने और अन्य सहायता सेवाओं

भारत में संगठन ने ‘यू.वी. ब्लास्टर’ नामक एक अल्ट्रा-वायलेट (यूवी) कीटाणुशोधन टॉवर को विकसित किया है?

उत्तर – DRDO नई दिल्ली स्थित लेजर साइंस एंड टेक्नोलॉजी सेंटर (डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन की एक प्रयोगशाला) ने गुड़गांव स्थित एक निजी फर्म के साथ मिलकर ‘यूवी ब्लास्टर’ नाम से एक अल्ट्रा वायलेट (यूवी) कीटाणुशोधन टॉवर विकसित किया है। इस उपकरण का उपयोग प्रयोगशालाओं में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, कंप्यूटर और अन्य गैजेट्स के कीटाणुशोधन

हाल ही में कश्मीरी केसर को भौगोलिक संकेत (GI) टैग दिया गया है। विश्व में केसर का सबसे बड़ा उत्पादक देश कौन सा है?

उत्तर – ईरान कश्मीर घाटी में केसर की खेती को भौगोलिक संकेत टैग प्रदान किया गया है। कश्मीरी केसर दुनिया का एकमात्र केसर है जो 1,600 मीटर की ऊंचाई पर उगाया जाता है। कश्मीरी केसर एक विश्व प्रसिद्ध मसाला है और यह पुलवामा, किश्तवाड़, बडगाम और श्रीनगर के क्षेत्रों में उगाया जाता है।

चकमा और हजोंग समुदाय, जो हाल ही में सुर्ख़ियों थे, किस भारतीय राज्य / केंद्रशासित प्रदेश में मौजूद हैं?

उत्तर – अरुणाचल प्रदेश 1 मई, 2020 को पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास मंत्रालय ने अरुणाचल प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि COVID-19 राहत कार्यक्रम में हजोंग और चकमा समुदायों को शामिल किया जाए। चकमा और हजोंग समुदाय, तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) के प्रवासी अभी भी राहत शिविरों में रह रहे हैं। वे 1964 में