आर्य समाज
आर्य समाज उन्नीसवीं शताब्दी के दौरान भारत में एक शक्तिशाली धार्मिक आंदोलन था। इस आंदोलन का नेतृत्व स्वामी दयानंद सरस्वती ने किया था, जिन्होंने 1875 में इसकी शुरुआत की थी। आर्य समाज की विचारधारा और संचालन के तरीके में ब्रह्म समाज के साथ समानता थी। दयानंद सरस्वती एक संन्यासी (त्यागी) थे, जो वेदों में विश्वास